रायपुर-बलौदाबाजार फोरलेन: 1500 करोड़ का प्रोजेक्ट 8 महीने से फाइलों में कैद, जमीन अधिग्रहण पूरा फिर भी टेंडर का अता-पता नहीं

रायपुर-बलौदाबाजार फोरलेन: 1500 करोड़ का प्रोजेक्ट 8 महीने से फाइलों में कैद, जमीन अधिग्रहण पूरा फिर भी टेंडर का अता-पता नहीं

NJV DESK | रायपुर. राजधानी रायपुर को बलौदाबाजार से जोड़ने वाली सबसे अहम और व्यस्त सड़क का हाल बेहाल है। 1500 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित 'रायपुर-बलौदाबाजार फोरलेन सड़क परियोजना' लालफीताशाही और अफसरों की सुस्ती की भेंट चढ़ गई है। हैरानी की बात यह है कि 72 किलोमीटर लंबी इस सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। पिछले साल सितंबर 2025 में ही अधिग्रहित जमीन की खरीदी-बिक्री पर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया गया था। लेकिन, सिस्टम की कछुआ चाल देखिए कि 8 महीने बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पाई है।

रोजाना घंटों जाम और हादसों का दंश झेल रही जनता

प्रशासनिक सुस्ती का सीधा खामियाजा आम जनता और राहगीरों को उठाना पड़ रहा है। इस मार्ग पर धनेली, नरदहा और टेकारी रेलवे क्रॉसिंग क्षेत्र से गुजरने वाले लाखों लोग रोज परेशान हो रहे हैं। भारी वाहनों और ट्रकों की अंधाधुंध आवाजाही के कारण इन इलाकों में घंटों लंबा जाम लगना अब आम बात हो गई है। संकरी सड़क और बेतहाशा ट्रैफिक के चलते यहां हादसों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल हाईवे (NH) विभाग ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का डीपीआर (DPR) बहुत पहले तैयार कर लिया था, लेकिन धरातल पर काम पूरी तरह से सिफर है।

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आखिर क्यों अटका है टेंडर?

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विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद टेंडर जारी न हो पाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं, जिनमें केंद्र और राज्य के बीच का तकनीकी पेंच भी शामिल है:

दिल्ली में अटकी फंड की फाइल: जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अब निर्माण कार्य के लिए मुख्य बजट आवंटन (फंड रिलीज) किया जाना है। लेकिन इस भारी-भरकम बजट की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति की फाइल फिलहाल दिल्ली में ही अटकी हुई है।

डिजाइन और अलाइनमेंट का तकनीकी पेंच: विधानसभा मार्ग और रेलवे क्रॉसिंग के पास यातायात को सुगम बनाने के लिए फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं। इनके डिजाइन और अलाइनमेंट के री-वेरिफिकेशन का काम चल रहा है। इसकी तकनीकी मंजूरी मिलने में उम्मीद से कहीं ज्यादा वक्त लग रहा है। जब तक वहां से ग्रीन सिग्नल नहीं मिलता, एनएच विभाग टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकता।

इस पूरी लेटलतीफी पर अफसरों का रवैया भी रस्मी ही नजर आ रहा है। मामले में लोक निर्माण विभाग के ईएनसी (ENC) विजय कुमार भतपहरी का कहना है प्रोजेक्ट पर लगातार काम चल रहा है। तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होते ही टेंडर प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी।

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