पीएचक्यू में दूर होगा टॉप लेवल का प्रमोशन जाम 30 साल की सर्विस वाले तीन आईपीएस बनेंगे स्पेशल डीजी साय सरकार बनाने जा रही पक्का नियम

पीएचक्यू में दूर होगा टॉप लेवल का प्रमोशन जाम 30 साल की सर्विस वाले तीन आईपीएस बनेंगे स्पेशल डीजी साय सरकार बनाने जा रही पक्का नियम

रायपुर. छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के शीर्ष नेतृत्व में जल्द ही बड़ा फेरबदल और पदोन्नति का रास्ता खुलने वाला है। राज्य पुलिस महकमे के टॉप लेवल पर लंबे समय से लगे प्रमोशन जाम को पूरी तरह क्लियर करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार अब एक स्थायी और मजबूत रास्ता निकाल रही है। मंत्रालय सूत्रों की मानें तो जल्द ही आगामी कैबिनेट बैठक में तीन नए स्पेशल डीजी पद सृजित करने के अहम प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। इस बड़े फैसले के बाद 1994 बैच के तेजतर्रार अफसर एसआरपी कल्लूरी 1995 बैच के प्रदीप गुप्ता और 1996 बैच के विवेकानंद सिन्हा का एडीजी रैंक से प्रमोट होकर स्पेशल डीजी बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

 यूपीएससी तय नियमों के मुताबिक तीस साल की सेवा पूरी कर चुके आईपीएस अधिकारी डीजी रैंक के लिए विधिवत पात्र हो जाते हैं। कल्लूरी गुप्ता और सिन्हा की सर्विस जनवरी 2026 में तीस साल की अवधि पूरी कर चुकी है। लेकिन यहां एक बड़ा तकनीकी पेंच यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य में डीजी के केवल चार पद ही स्वीकृत हैं। इन चार पदों पर पहले से ही वरिष्ठ आईपीएस अरुणदेव गौतम पवनदेव हिमांशु गुप्ता और जीपी सिंह काबिज हैं। ऊपर कोई कुर्सी खाली न होने के कारण इन तीनों सीनियर अफसरों का जायज प्रमोशन अटका हुआ था। इसी जटिल डेडलॉक को तोड़ने के लिए राज्य सरकार नए और पुख्ता नियमों के साथ तीन स्पेशल डीजी के पद सृजित कर रही है ताकि भविष्य में यह व्यवस्था बिना किसी कानूनी विवाद के सुचारू रूप से चलती रहे।

 केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी का अनिवार्य प्रावधान

इंडियन पुलिस सर्विस कैडर रूल्स 1954 के रूल 4 सब रूल 2 और संबंधित प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा डीजी या स्पेशल डीजी जैसे उच्च पदों पर प्रमोशन या अतिरिक्त पद सृजन के लिए केंद्र सरकार अर्थात केंद्रीय गृह मंत्रालय की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होती है। बिना इस अनुमति के किया गया कोई भी प्रमोशन अमान्य माना जाता है। पूर्ववर्ती सरकार ने इन्ही नियमों का हवाला देकर पदों को समाप्त किया था। साय सरकार अब इस बात का पूरा ध्यान रख रही है कि दिल्ली से सभी जरूरी स्वीकृतियां विधिवत प्राप्त की जाएं ताकि भविष्य में कोई इसे चुनौती न दे सके।

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स्पेशल डीजी पद का दिलचस्प सियासी फ्लैशबैक

प्रशासनिक और पुलिस हलकों में यह बहुप्रतीक्षित बदलाव इसलिए भी अत्यधिक चर्चा में है क्योंकि इसका अपना एक गहरा सियासी इतिहास रहा है। यह छत्तीसगढ़ में दूसरा मौका है जब स्पेशल डीजी के पद बनाए जा रहे हैं। इससे पहले साल 2017 और 2018 के दौरान तत्कालीन डॉ रमन सिंह की सरकार ने सीनियर आईपीएस संजय पिल्ले मुकेश गुप्ता और आरके विज को यह पद प्रदान किया था। लेकिन साल 2019 में सत्ता परिवर्तन होते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे नियमों के सख्त खिलाफ बताते हुए तीनों अफसरों का प्रमोशन रद्द कर दिया था और उन्हें वापस एडीजी के पद पर डिमोट कर दिया था। अब हाल ही में 29 अप्रैल को साय सरकार ने न सिर्फ बघेल सरकार के उस विवादित आदेश को पूरी तरह निरस्त किया बल्कि रिटायर्ड आईपीएस मुकेश गुप्ता के सर्विस रिकॉर्ड में एडीजी की जगह स्पेशल डीजी दर्ज करवाकर यह कड़ा संदेश दे दिया कि मौजूदा सरकार पुलिस के आला अफसरों के वाजिब हकों के साथ मजबूती से खड़ी है।

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साल 2027 में बिछेगी पुलिस महकमे की नई बिसात

स्पेशल डीजी बनने से इन तीनों अफसरों को न सिर्फ डीजीपी के ठीक नीचे का रुतबा बेहतरीन पे मैट्रिक्स बड़ा स्टाफ और शानदार रिटायरमेंट बेनेफिट्स मिलेंगे बल्कि भविष्य के प्रशासनिक समीकरण भी पूरी तरह सेट होंगे। जुलाई 2027 में डीजी अरुणदेव गौतम रिटायर होने वाले हैं तब एसआरपी कल्लूरी को स्पेशल डीजी से रेगुलर डीजी के पद पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। वहीं राज्य के मौजूदा डीजीपी भी साल 2027 में ही रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद पुलिस महकमे के नए मुखिया यानी नए डीजीपी की रेस में हिमांशु गुप्ता और जीपी सिंह के बीच मुख्य और रोचक दावेदारी देखने को मिलेगी। फिलहाल साय सरकार के इस सकारात्मक कदम ने पुलिस के टॉप कैडर में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया है।

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