प्रभार का महा-खेल और जल संसाधन विभाग की गुगली: हाईकोर्ट की फटकार, फिर भी सीनियर दरकिनार, अब मक्सी कुजूर को सौंपी CE की कुर्सी
रायपुर।छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग (WRD) में महानदी-गोदावरी कछार, रायपुर के चीफ इंजीनियर (CE) की कुर्सी को लेकर चल रहा सस्पेंस किसी 'पॉलिटिकल थ्रिलर' से कम नहीं है। विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग का ऐसा 'म्यूजिकल चेयर' चल रहा है, जिसे देखकर खुद नियम-कानून भी अपना सिर पीट लें। जल संसाधन विभाग की गुगली ऐसी है कि हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बावजूद विभाग के रणनीतिकारों ने अपनी जिद नहीं छोड़ी। अदालत ने कान उमेठे तो मोहरा बदल दिया, लेकिन जिस सीनियर अफसर का इस कुर्सी पर वास्तविक हक था, उसे इसके करीब फटकने तक नहीं दिया।
हाईकोर्ट की फटकार, लेकिन मिंज फिर भी आउट
यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा तब शुरू हुआ जब 30 अप्रैल को तत्कालीन चीफ इंजीनियर सतीश कुमार टीकम रिटायर हुए। नियम, कायदे और वरिष्ठता के हिसाब से महानदी-गोदावरी कछार कार्यालय में ही पदस्थ सबसे सीनियर अधीक्षण अभियंता (SE) सिल्वेस्टर मिंज इस कुर्सी के प्रबल दावेदार थे। लेकिन, विभाग ने मिंज के दावों को रद्दी की टोकरी में डालते हुए 8 मई 2026 को एक ऐसा 'अजूबा' आदेश निकाला जिसने मंत्रालय के गलियारों में हड़कंप मचा दिया।
विभाग ने आंतरिक/वैकल्पिक व्यवस्था' का मुखौटा पहनाकर एक ऐसे जूनियर अफसर सुरेश कुमार पाण्डेय को प्रभारी मुख्य अभियंता बना दिया, जो न केवल इस मलाईदार पद के लिए सर्वथा अयोग्य थे, बल्कि जिनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में आय से अधिक संपत्ति का बेहद मजबूत और संगीन मामला दर्ज है।
जब कोर्ट का डंडा चला, तो बदली चाल
सीनियर एसई सिल्वेस्टर मिंज ने विभाग की इस खुली मनमानी के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया (WPS 4179/2026)। 15 मई 2026 को अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसा आदेश पारित किया, जिससे विभाग के पसीने छूट गए।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे मसालेदार और हैरान करने वाला पहलू यह है
न्यायालय को ठेंगा: हाईकोर्ट की स्पष्ट फटकार के बाद भी विभाग ने सिल्वेस्टर मिंज को उनकी जायज पदस्थापना नहीं दी।
पहला मोहरा: पहले भ्रष्ट और जूनियर सुरेश पाण्डेय को प्रभारी मुख्य अभियंता बनाकर मिंज का रास्ता रोका गया।
दूसरा मोहरा: कोर्ट की फटकार के बाद 8 मई का विवादित आदेश आनन-फानन में (15 मई को) निरस्त कर दिया गया। लेकिन मिंज को कुर्सी देने के बजाय, विभाग ने फिर से एक नई गुगली फेंक दी और महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता मक्सी कुजूर को महानदी गोदावरी कछार का अतिरिक्त प्रभार थमा दिया।
ACB के शिकंजे वाले इंजीनियर पर मेहरबानी का फ्लॉप शो
सुरेश पाण्डेय पर हुई मेहरबानी ने पहले ही सरकार की फजीहत करा दी थी। 2015 में ACB के छापे में करोड़ों की काली कमाई का खुलासा होने और पुख्ता चार्जशीट तैयार होने के बावजूद, रसूख के दम पर अभियोजन से बचने वाले पाण्डेय को इतनी अहम कमान सौंपना व्यवस्था के मुंह पर तमाचा था। अदालत की चौखट पर जब 'प्रभार का यह खेल' बेनकाब हुआ, तो शासन को उल्टे पांव भागना पड़ा।
अदालत और नियमों के साथ भद्दा मजाक
जल संसाधन विभाग की बार-बार अभियंता बदलने की यह कार्यवाही किसी 'कॉमेडी सर्कस' से कम नहीं है।
शासन यह तय करके बैठा है कि चाहे जो हो जाए, मलाईदार कुर्सियां सिर्फ पसंदीदा चेहरों को ही देनी हैं, भले ही इसके लिए रोज नियम बदलने पड़ें।
जब कोर्ट एक आदेश पर स्टे लगाता है या फटकार लगाता है, तो विभाग बेशर्मी से वैकल्पिक व्यवस्था और अतिरिक्त प्रभार जैसे शब्दों की बाजीगरी कर नया आदेश निकाल देता है।
Edited By: मनीशंकर पांडेय
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