बस्तर की नई लाइफलाइन या विस्थापन का दर्द? 45 साल बाद फिर जिंदा हुआ बोधघाट डैम का जिन्न, दांव पर 56 गांव

9.34 लाख एकड़ जमीन की प्यास बुझाने के लिए 49 हजार करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट तैयार है, लेकिन जान देंगे, जमीन नहीं के नारों ने फिर बढ़ाई सरकार की टेंशन।

बस्तर की नई लाइफलाइन या विस्थापन का दर्द? 45 साल बाद फिर जिंदा हुआ बोधघाट डैम का जिन्न, दांव पर 56 गांव

NJV डेस्क / जगदलपुर

बस्तर की शांत वादियों में एक बार फिर विकास और विस्थापन के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। दशकों से लालफीताशाही और फाइलों में दफन रहा बोधघाट बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट का जिन्न 45 साल बाद फिर बोतल से बाहर आ गया है। इंद्रावती नदी पर बनने वाले इस 49 हजार करोड़ रुपए के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जहां बस्तर की नई लाइफलाइन कहकर प्रचारित किया जा रहा है, वहीं इसके एवज में 56 गांवों के जलसमाधि लेने के खौफ ने आदिवासियों को फिर से लामबंद कर दिया है। इंद्रावती के किनारों पर अब एक ही नारा गूंज रहा है- जान देंगे, जमीन नहीं।

एक नजर में बोधघाट प्रोजेक्ट:
 लक्ष्य:- दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 269 गांवों की 9.34 लाख एकड़ जमीन को सिंचाई।
 डूब क्षेत्र:प्रोजेक्ट पूरा होने पर 56 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे।
सर्वेक्षण:दिल्ली की वेपकोस (WAPCOS) लिमिटेड ने सर्वे शुरू किया, 3 महीने का अल्टीमेटम।

 

Read More पोस्ट ऑफिस की RD के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! 150 से ज्यादा खाताधारकों से करोड़ों की ठगी, एजेंट गिरफ्तार

बंजर जमीन को हरा-भरा करने की कीमत

यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक डैम नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित बस्तर की तकदीर बदलने का एक मेगा प्लान है। सरकार का नया एंगल यह है कि अब इसका फोकस सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि खेतों तक पानी पहुंचाना है। अकेले दंतेवाड़ा जिले के 100 से ज्यादा गांव इस सिंचाई नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़ेंगे, जिससे किसानों को साल भर पानी मिलेगा। लेकिन विकास की इस सुनहरी तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद डरावना है। लाखों एकड़ जमीन को सींचने के लिए जिन 56 गांवों को डुबाया जाना है, वहां के आदिवासी अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

Read More सड़कों पर मवेशी, हादसों का डर… अब पशुओं को लेकर प्रशासन के दरवाजे पहुंचे ग्रामीण, अफसर रह गए हैरान!

45 साल का संघर्ष: बिजली से लेकर सिंचाई तक का सफर

बोधघाट का इतिहास बताता है कि इस डैम की राह कभी आसान नहीं रही। 1979 में जब अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर में यह योजना बनी, तब इसका मूल उद्देश्य 500 मेगावाट बिजली पैदा करना था। 1984 में वर्ल्ड बैंक ने इसके लिए लोन भी मंजूर किया। लेकिन, जैसे ही पेड़ों की कटाई शुरू हुई, पर्यावरणविदों और आदिवासियों के उग्र आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। आखिरकार 1987 में केंद्र सरकार को इस पर रोक लगानी पड़ी और वर्ल्ड बैंक ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए।

क्या इस बार बन पाएगी बात?

साल 2020 के आसपास इसे नए सिरे से बहुउद्देशीय परियोजना का रूप देकर पुनर्जीवित किया गया है। आज इसकी लागत शुरुआती बजट से बढ़कर 49,000 करोड़ रुपए तक जा पहुंची है। दिल्ली की वेपकोस कंपनी को तीन महीने में सर्वे पूरा करने का टारगेट दिया गया है, जिसके बाद प्रशासन को सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा विस्थापन एवं पुनर्वास नीति से गुजरना होगा।

 

ये है बोधघाट का इतिहास

1979 - नींव और पहला ब्लूप्रिंट: अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर में केंद्र सरकार ने इंद्रावती नदी पर बोधघाट प्रोजेक्ट को पहली बार हरी झंडी दिखाई। उस समय इसका एकमात्र लक्ष्य 500 मेगावाट जलविद्युत (Hydroelectric) उत्पादन करना था।

1984 - वर्ल्ड बैंक की एंट्री और विरोध का जन्म परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक ने करोड़ों का लोन मंजूर किया। लेकिन विशालकाय जंगल के डूबने और लाखों पेड़ों की कटाई की खबर लगते ही पर्यावरणविदों और स्थानीय आदिवासियों ने 'चिपको' की तर्ज पर उग्र आंदोलन छेड़ दिया।

1987  प्रोजेक्ट पर लगा 'रेड सिग्नल': जमीन और जंगल बचाने के लिए बढ़ते जन-आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार को अंततः इस पर रोक लगानी पड़ी। हालात देखते हुए वर्ल्ड बैंक ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए और प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।

2020 - मास्टरप्लान में बदलाव: दशकों बाद प्रोजेक्ट की फाइल से फिर धूल हटाई गई। रणनीति बदली गई और इसे केवल बिजली तक सीमित न रखकर 'बहुउद्देशीय परियोजना' का नाम दिया गया। अब पूरा फोकस दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के खेतों को सींचने पर शिफ्ट कर दिया गया।

2024/वर्तमान - बजट में उछाल और वही पुरानी चुनौती: 45 सालों के इस सफर में प्रोजेक्ट की लागत कई गुना बढ़कर 49,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। सर्वे का काम वेपकोस लिमिटेड को सौंपा गया है, लेकिन 1980 के दशक वाली 'विस्थापन और विरोध' की मूल चुनौती आज भी प्रशासन के सामने सीना ताने खड़ी है।

Error on ReusableComponentWidget
Tags:

Latest News

छत्तीसगढ़ में 22 IAS अफसरों के तबादले... कांकेर, कबीरधाम समेत 5 जिलों को मिले नए कलेक्टर, देखें लिस्ट  छत्तीसगढ़ में 22 IAS अफसरों के तबादले... कांकेर, कबीरधाम समेत 5 जिलों को मिले नए कलेक्टर, देखें लिस्ट 
जिला पंचायत CEO के खिलाफ BSP का प्रदर्शन, FIR और बर्खास्तगी की मांग
बैकुंठपुर से बनारस तक फैले टिकट दलाली नेटवर्क का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
मीना खलखो हत्याकांड: दो जवानों की रिहाई बरकरार, हाई कोर्ट ने राज्य की अपील की खारिज
बाल सुधार गृह में रेप आरोपी की संदिग्ध मौत, फांसी के फंदे पर मिली लाश, एक महीने पहले चौकीदार की हुई थी हत्या
नमक की बोरियों के नीचे छिपा था ‘काला कारोबार’! सुकमा में 308 किलो गांजा जब्त, राजस्थान के दो युवक गिरफ्तार
हिमाचल में बारिश का रौद्र रूप: पहाड़ टूटकर पटरी पर गिरा, कालका-शिमला ट्रेन थमी; हाईवे भी मलबे में घिरा
रायपुर में रेलवे ट्रैक पर 19 साल के युवक की लाश, शरीर पर चोटों ने बढ़ाया शक; हत्या के एंगल से जांच तेज
हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर सूरजपुर जिला पंचायत सीईओ को नोटिस, अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
बिलासपुर में मॉडल थाना बनाने की पहल, एसएसपी ने लिया सिविल लाइन थाना को गोद
Royal Challenge से McDowell’s तक बदल सकता है स्वाद! Diageo ने बदला फॉर्मूला, फ्लेवरिंग नियमों के बाद पूरे भारत में होगी नई व्यवस्था
जंतर-मंतर प्रदर्शन में Face Recognition पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, बोली- ‘शांतिपूर्ण छात्रों को निशाना नहीं बनाया’