केशकाल बायपास की 'अंधेरगर्दी': अफसरों की एक चूक से कट गए 8,159 पेड़, अब सही अलाइनमेंट के नाम पर 6 हजार और पेड़ों की बलि!

केशकाल बायपास की 'अंधेरगर्दी': अफसरों की एक चूक से कट गए 8,159 पेड़, अब सही अलाइनमेंट के नाम पर 6 हजार और पेड़ों की बलि!

कोंडागांव। विकास के नाम पर विनाश और सरकारी सिस्टम की घोर लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण शायद ही कहीं और देखने को मिले। बस्तर का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले केशकाल में बहुचर्चित बायपास प्रोजेक्ट अब विकास से ज्यादा लालफीताशाही और 'नाकामी' की मिसाल बन चुका है। जिस बायपास को सालों पहले शुरू होकर खत्म हो जाना था, वह 10 साल बाद भी अधूरा है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अफसरों की एक भारी चूक के चलते बिना सही अलाइनमेंट जांचे 8,159 हरे-भरे पेड़ों पर बेरहमी से आरी चला दी गई। और अब, उसी गलती को सुधारने के नाम पर 6 हजार से ज्यादा और पेड़ों को काटने की तैयारी है।

कैसे हुआ यह पर्यावरणीय महाघोटाला ?

जानकारी के मुताबिक, साल 2016-17 में नेशनल हाईवे (NH) विभाग ने वन विभाग को बायपास का अलाइनमेंट मैप सौंपा था। इसी मैप को 'ब्रह्मावाक्य' मानकर वन विभाग ने बिना मौके का मुआयना किए धड़ाधड़ 8,159 पेड़ काट डाले। बाद में जब जमीनी हकीकत सामने आई, तो पता चला कि 11 किलोमीटर लंबे इस बायपास का करीब 5 से 6 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह से गलत अलाइनमेंट पर था! यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब इतने बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही थी, तब मौके पर जाकर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने की जहमत क्यों नहीं उठाई? वातानुकूलित कमरों में बैठकर जंगल उजाड़ने का यह खेल बताता है कि मैदानी स्तर पर मॉनिटरिंग पूरी तरह से शून्य थी।

ठेकेदार भागा, लागत 308 करोड़ पहुंची

 

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केशकाल बायपास का काम जिस मुंबई की कंपनी को सौंपा गया था, वह काम को बीच में ही अधूरा छोड़कर भाग खड़ी हुई। सालों तक यह प्रोजेक्ट फाइलों में धूल फांकता रहा। नतीजा यह हुआ कि देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत अब बढ़कर लगभग 308 करोड़ रुपए के भारी-भरकम आंकड़े तक पहुंच गई है। अब जब यह अंधेरगर्दी उजागर हुई है, तो वन विभाग और नेशनल हाईवे के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी लेने के बजाय एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हुए हैं।

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पीसीसीएफ ने मांगी रिपोर्ट, कलेक्टर ने लगाई फटकार

 

इस मामले के सामने आने के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है। वन विभाग के उप सचिव ने इस गंभीर मामले में पीसीसीएफ (PCCF) से तत्काल जांच रिपोर्ट तलब की है और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, केशकाल डीएफओ दिव्या गौतम ने बताया कि एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है जो मौके का दोबारा सर्वे कर रही है।

दूसरी ओर, कोंडागांव कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना ने इस भारी लापरवाही पर संबंधित विभागों के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और जो भी अधिकारी इस लापरवाही के लिए दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने वन विभाग के साथ समन्वय बनाकर नया सर्वे करने के निर्देश दिए हैं ताकि नए अलाइनमेंट में कम से कम पेड़ों का नुकसान हो।

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