CG आबकारी घोटाला: 3000 कर्मचारियों के पसीने की कमाई डकार गया सिंडिकेट, ओवरटाइम और बोनस के नाम पर 183 करोड़ की लूट 

CG आबकारी घोटाला: 3000 कर्मचारियों के पसीने की कमाई डकार गया सिंडिकेट, ओवरटाइम और बोनस के नाम पर 183 करोड़ की लूट 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक और बड़ा धमाका किया है। अब तक शराब की बोतलों, फर्जी होलोग्राम और अनअकाउंटेड शराब की बिक्री के खेल सामने आ रहे थे, लेकिन ईओडब्ल्यू की ताजा चार्जशीट ने सिस्टम की संवेदनहीनता की एक नई तस्वीर पेश की है। सिंडिकेट ने इस बार सरकारी खजाने के साथ-साथ शराब दुकानों में दिन-रात खटने वाले 3000 से ज्यादा कर्मचारियों के हक़ पर भी डाका डाला है।

ओवरटाइम, हॉलीडे-पे, बोनस और सर्विस टैक्स का झांसा देकर प्लेसमेंट एजेंसियों और आबकारी विभाग के अफसरों ने मिलकर 182 करोड़ 98 लाख रुपये का वारे-न्यारे कर दिए। इस मामले में EOW ने कारोबारी अनवर ढेबर और तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी नवीन प्रताप तोमर समेत 12 लोगों के खिलाफ 3200 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष अदालत में पेश कर दी है।

ऐसे रचा गया 183 करोड़ की लूट का चक्रव्यूह

ईओडब्ल्यू की तफ्तीश में जो कहानी निकलकर आई है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। सिंडिकेट ने भ्रष्टाचार का ऐसा मॉडल तैयार किया जिसमें प्लेसमेंट एजेंसियों को ढाल बनाया गया। प्रदेशभर की शराब दुकानों में तैनात लगभग 3000 कर्मचारियों के नाम पर शासन से बकायदा ओवरटाइम, छुट्टियों में काम करने का पैसा (हॉलीडे-पे) और बोनस की मोटी रकम स्वीकृत कराई गई।

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कागजों पर सब कुछ बिल्कुल पारदर्शी दिखाया गया, लेकिन हकीकत में यह रकम कभी उन कर्मचारियों के बैंक खातों तक पहुंची ही नहीं। जिन कर्मचारियों के नाम पर यह फंड निकाला गया, वे इस पूरी प्रक्रिया से अनजान रहे और उनके हिस्से का 182.98 करोड़ रुपया सिंडिकेट और प्लेसमेंट कंपनियों के संचालकों के खातों में ट्रांसफर हो गया।

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नौकरशाही और कारोबारियों का गठजोड़: इन पर कसा शिकंजा

3200 पन्नों के इस आरोप पत्र में EOW ने मनी ट्रेल और फर्जीवाड़े के एक-एक दस्तावेजी सबूत कोर्ट को सौंपे हैं। इसमें कारोबारी अनवर ढेबर को मुख्य कर्ताधर्ता बताया गया है, जबकि तत्कालीन आबकारी अधिकारी नवीन प्रताप तोमर की भूमिका इस पूरे गबन को विभागीय संरक्षण देने की रही।

जांच एजेंसी ने उन 5 प्रमुख प्लेसमेंट एजेंसियों के कर्ताधर्ताओं को भी कटघरे में खड़ा किया है, जिनके जरिए यह 'ब्लैक मनी' सफेद की जा रही थी।

चार्जशीट में शामिल अन्य प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
  •  अलर्ट कमांडोज: अजय लोहिया
  • सुमित फैसिलिटीज: अजीत दरंदले और अमित प्रभाकर सालुंके
  • ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस:** उदय राव और अमित मित्तल
  •  प्राइम वन वर्कफोर्स: राजीव द्विवेदी और संजीव जैन
  •  ईगल इंटर सॉल्यूशन: नीरज चौधरी
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