CG में नए 'वन बल प्रमुख' की तलाश: 31 मई को राव और झा की रिटायरमेंट; क्या मिलेगा एक्सटेंशन या प्रभारी के भरोसे चलेगा महकमा?
रायपुर।छत्तीसगढ़ में पुलिस महकमे (DGP) के शीर्ष पद पर बदलाव के बाद अब विष्णुदेव साय सरकार का फोकस राज्य के वन विभाग के मुखिया यानी 'हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स' (HoFF) की नियुक्ति पर टिक गया है। वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव और पीसीसीएफ (PCCF) तपेश झा इसी महीने 31 मई को रिटायर हो रहे हैं। अखबारों की सुर्खियां भले ही इन दोनों बड़े अधिकारियों के रिटायरमेंट तक सीमित हों, लेकिन मंत्रालय के गलियारों में असली चर्चा और लॉबिंग इस बात को लेकर तेज हो गई है कि वन महकमे का अगला 'बॉस' कौन होगा?
सवाल यह है कि क्या सरकार किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी, किसी सीनियर को प्रभार सौंपेगी, या फिर पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा की तर्ज पर राव को एक्सटेंशन का 'सरप्राइज' मिलेगा?
डीपीसी टलने की इनसाइड स्टोरी
हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स के चयन के लिए 7 मई को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की अहम बैठक होनी थी, लेकिन इसे अंतिम समय में टाल दिया गया। इस स्थगन ने ब्यूरोक्रेसी में कई अटकलों को जन्म दे दिया है। सूत्रों की मानें तो डीपीसी टलने का सीधा अर्थ है कि सरकार अभी विकल्पों पर गहराई से मंथन कर रही है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती।
वरिष्ठता सूची और दावेदारों पर नजर डालें तो पीसीसीएफ अरुणा पांडेय और कौशलेन्द्र कुमार रेस में सबसे आगे हैं। एक और वरिष्ठ नाम अनिल साहू का है, लेकिन पेंच यह है कि उनकी रिटायरमेंट इसी साल जुलाई में है। ऐसे में महज दो महीने के लिए किसी को वन बल प्रमुख जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपने का जोखिम सरकार शायद ही उठाए। माना जा रहा है कि जुलाई में साहू के रिटायर होने के बाद ही फुल टाइम HoFF के लिए नई डीपीसी बुलाई जा सकती है।
प्रभारी के हाथ कमान या नए नामों की एंट्री?
वन महकमे के जानकारों का कहना है कि जब तक फुल टाइम नियुक्ति नहीं होती, तब तक विभाग प्रभारी के भरोसे चल सकता है। खुद वी. श्रीनिवास राव को भी शुरुआत में प्रभार ही दिया गया था और बाद में डीपीसी की मुहर लगने पर वे प्रमोट हुए थे। ऐसे में पूरी संभावना है कि 31 मई के बाद अरुणा पांडेय या कौशलेन्द्र कुमार में से किसी एक को HoFF का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया जाए।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले दिनों हुई डीपीसी के बाद 1995 बैच के एपीसीसीएफ ओपी यादव और संजीता गुप्ता का पीसीसीएफ के पद पर प्रमोशन तय हो गया है। 31 मई को दोनों इस पद पर आसीन हो जाएंगे, जिससे आने वाले समय में सीनियरिटी और दावेदारी के समीकरण और भी रोचक हो जाएंगे।
एक्सटेंशन का 'वाइल्ड कार्ड'
इस पूरी कवायद में जो एंगल सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है, वह है एक्सटेंशन की सुगबुगाहट। वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों के बीच दबी जुबान में यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या सरकार वी. श्रीनिवास राव को सेवा विस्तार दे सकती है? हालांकि, छत्तीसगढ़ वन विभाग के इतिहास में एक्सटेंशन की परंपरा ना के बराबर रही है। लेकिन नई सरकार के काम करने के तरीके को देखते हुए किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
