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महीनों तक टोकन के लिए भटकता रहा अन्नदाता, जब नहीं बिका धान तो किसान ने खाया जहर
कोरबा। जिले में धान खरीदी की बदहाली ने एक और किसान की जान जोखिम में डाल दी है। हरदीबाजार इलाके के ग्राम पुटा में रहने वाले किसान सुमेर सिंह ने धान न बिकने और टोकन न मिलने से परेशान होकर जहर खा लिया। पिछले एक महीने से खरीदी केंद्र के चक्कर काट रहे किसान को जब कहीं से कोई उम्मीद नहीं दिखी तो उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। फिलहाल किसान को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
फड़ प्रभारी की मनमानी ने तोड़ी हिम्मत
किसान सुमेर सिंह का आरोप है कि वह अपना धान बेचने के लिए हफ्तों से परेशान था। फड़ प्रभारी उसे रोज आज कल कहकर टाल रहा था। घर में आर्थिक तंगी और ऊपर से धान न बिकने के तनाव ने उसे भीतर से तोड़ दिया। किसान के परिवार ने बताया कि वह अपनी उपज बेचने के लिए हर दरवाजे पर गया लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने उसे जहर खाने पर मजबूर कर दिया।
जनदर्शन की अर्जी भी फाइलों में दब गई
हैरानी की बात यह है कि किसान ने अपनी समस्या को लेकर कलेक्टर के जनदर्शन में भी गुहार लगाई थी। वहां भी उसे सिर्फ आश्वासन मिला लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं हुआ। प्रशासन की इस बेरुखी ने अन्नदाता को यह कदम उठाने पर विवश कर दिया। इस घटना ने प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है जिसमें किसानों को कोई दिक्कत न होने की बात कही जाती है।
अस्पताल पहुंचीं सांसद ज्योत्सना महंत
घटना की खबर मिलते ही कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित किसान और उसके परिजनों से बात कर ढांढस बंधाया। सांसद ने डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए और मौके से ही प्रशासनिक अधिकारियों को फोन लगाकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि धान खरीदी में हो रही यह लापरवाही बर्दाश्त से बाहर है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
