एसीबी जांच और हाई कोर्ट की सख्ती के बावजूद दागी अफसर की बिलासपुर में वापसी

बिलासपुर। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई का सामना कर रहे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नारायण प्रसाद गबेल की बिलासपुर में बतौर डिप्टी कलेक्टर वापसी ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। यह वही जिला है जहां तहसीलदार रहते हुए उन पर जमीनों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस एकतरफा रिलीविंग आदेश ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है कि आखिर किस रसूख के चलते एक दागी अधिकारी को उसी जिले में दोबारा पदस्थ किया गया है, जहां उसके खिलाफ जांच और विवादों का लंबा इतिहास रहा है।
इस पूरे मामले की परतें खंगालने पर पता चलता है कि यह केवल एक सामान्य तबादला नहीं है। करीब पांच साल पहले 24 जून 2021 को बिलासपुर में तहसीलदार रहते हुए नारायण गबेल पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एसीबी ने एफआईआर दर्ज की थी। जांच की धीमी गति को लेकर सरकंडा निवासी शिकायतकर्ता सूरज सिंह यादव ने बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। चीफ जस्टिस और जस्टिस रजनी दुबे की डिवीजन बेंच ने इस क्रिमिनल रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए शासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जांच तीन सप्ताह के भीतर पूरी की जाए और चार सप्ताह में अभियोजन की मंजूरी के लिए सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी जाए। न्यायालय की इतनी सख्त टिप्पणी के बावजूद, अधिकारी पर शिकंजा कसने के बजाय उन्हें बिलासपुर जिला मुख्यालय में डिप्टी कलेक्टर जैसा महत्वपूर्ण पद सौंप दिया गया है।
गबेल का बिलासपुर का पिछला कार्यकाल जमीनी हेराफेरी और विवादों का केंद्र रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान हुए जमीन के खेल का सबसे त्रासद उदाहरण 80 वर्षीय वृद्धा मंगतीन बाई का मामला है। चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 214/10, 214/5 और 214/9 की अपनी पैतृक जमीन को भू-माफियाओं के चंगुल से बचाने के लिए यह बुजुर्ग महिला सालों तक तहसील दफ्तर के चक्कर काटती रही। जांच के नजरिए से सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि न्याय देने के बजाय, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार गबेल ने सिविल लाइन और सरकंडा थाने को बाकायदा सरकारी पत्र लिखकर इस 80 वर्षीय बुजुर्ग को मानसिक रूप से अस्वस्थ करार देने की कोशिश की थी, ताकि भू-माफियाओं के खिलाफ उठ रही उसकी आवाज को हमेशा के लिए दबाया जा सके।

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सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव क्लेमेंटीना द्वारा जारी किए गए ताजा आदेश ने अब बिलासपुर के राजस्व और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस आदेश की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गबेल को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया गया है, जो इस बात का साफ संकेत है कि उन्हें उच्च स्तर पर विशेष संरक्षण प्राप्त है। एक तरफ जहां व्यवस्था भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर एसीबी की राडार पर बैठे और विवादित अतीत वाले अफसर की जमीनों के उसी गढ़ में शानदार 'बैक एंट्री' कई अनुत्तरित सवाल छोड़ जाती है। शहर में अब यह चर्चा आम है कि आखिर वह कौन सी अनदेखी ताकत है, जो एक दागी अधिकारी को उसी पिच पर दोबारा खेलने का मौका दे रही है।

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मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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