कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी माहौल गरमा गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को राज्य की अंतिम मतदाता सूची (फाइनल SIR वोटर लिस्ट) जारी की, जिसमें कुल 65 लाख नाम हटाए जाने की पुष्टि हुई है। वहीं 60 लाख नाम अभी भी लंबित (पेंडिंग) बताए गए हैं, जिनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पिछले वर्ष 16 दिसंबर को जारी की गई थी। उस समय 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जिनमें मृत मतदाता, स्थानांतरित मतदाता और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम शामिल थे। फाइनल सूची जारी होने के बाद 7 लाख से अधिक अतिरिक्त नाम हटाए जाने से कुल संख्या 65 लाख तक पहुंच गई है।
भवानीपुर में बड़ा असर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भी मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है। फाइनल सूची के अनुसार:
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47,094 नाम हटाए गए
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14,154 नाम अनसुलझी (पेंडिंग) सूची में
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SIR प्रक्रिया की शुरुआत में कुल पंजीकृत मतदाता: 2,06,295
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ड्राफ्ट सूची में हटाए गए नाम: 44,786
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फाइनल सूची में अतिरिक्त हटाए गए नाम: 2,324
यदि दस्तावेज़ सत्यापन के बाद लंबित नाम भी हटाए जाते हैं, तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
पिछला चुनावी गणित
2021 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से तृणमूल उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने 28 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी। बाद में उपचुनाव में ममता बनर्जी ने 58 हजार से अधिक मतों के अंतर से विजय हासिल की थी।
सियासी बयानबाजी तेज
फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
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सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि यह सीट भाजपा की है और मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि इस बार परिणाम अलग होंगे।
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तृणमूल कांग्रेस के राज्य उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि यदि किसी का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसे बहाल कराने का अवसर उपलब्ध है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया।
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तृणमूल नेता तन्मय घोष ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर वैध मतदाताओं के साथ अन्याय हो रहा है और यदि ऐसा जारी रहा तो राजनीतिक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धिकरण प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
