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ग्लोबल तनाव का लोकल असर: छत्तीसगढ़ में फल-सब्जी कारोबार को 450 करोड़ का नुकसान, किसानों की टूटी कमर
रायपुर: अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब छत्तीसगढ़ की मंडियों तक साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के चलते निर्यात बाधित हुआ है, जिससे प्रदेश के फल उत्पादकों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। अनुमान है कि इस सीजन में करीब 450 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो चुका है, जबकि बाजार में फलों के दाम आधे से भी कम पर आ गए हैं।
भिलाई, दुर्ग और रायपुर की प्रमुख मंडियों में तरबूज, खरबूज और केले की भारी आवक के बावजूद मांग नहीं है। आमतौर पर ये फल मुंबई और विशाखापत्तनम बंदरगाहों के जरिए खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब और ओमान भेजे जाते थे, लेकिन मौजूदा हालात में निर्यात लगभग ठप हो गया है। इसका सीधा असर यह हुआ कि किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाजार में ही कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
प्रदेश के कई जिलों धमधा, बालोद, बेमेतरा, गरियाबंद, महासमुंद और जांजगीर-चांपा में इस बार बड़ी मात्रा में तरबूज और खरबूज की खेती की गई थी। वहीं केले के उत्पादकों की स्थिति और भी खराब है। जो केला पिछले साल 30 से 40 रुपये प्रति किलो बिकता था, वह इस बार थोक बाजार में 8 से 12 रुपये किलो तक गिर गया है। निर्यात एजेंटों के नहीं आने से किसानों को मजबूरन स्थानीय खपत पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही निर्यात मार्ग सामान्य नहीं हुआ, तो नुकसान और बढ़ सकता है। किसान और व्यापारी अब सरकार से राहत और वैकल्पिक बाजार की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यह साफ है कि वैश्विक तनाव का असर सीधे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, और इससे उबरने के लिए ठोस रणनीति की जरूरत है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
