छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में 'स्पेशलिस्ट' डॉक्टरों का हो रहा था गलत इस्तेमाल, अब स्वास्थ्य विभाग ने CMHO और सिविल सर्जनों को लगाई कड़ी फटकार

छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में 'स्पेशलिस्ट' डॉक्टरों का हो रहा था गलत इस्तेमाल, अब स्वास्थ्य विभाग ने CMHO और सिविल सर्जनों को लगाई कड़ी फटकार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ इलाज न मिल पाने की एक बेहद गंभीर वजह सामने आई है। प्रदेश के जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में प्रबंधन द्वारा विशेषज्ञ (MD/MS) डॉक्टरों की ड्यूटी कैजुअल्टी (आपातकालीन) और पोस्टमार्टम जैसे उन सामान्य कार्यों में लगाई जा रही थी, जो मूल रूप से MBBS डॉक्टरों का काम है। अब इस प्रशासनिक मनमानी पर स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने कड़ा रुख अपनाया है। संचालनालय ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं बेवजह कैजुअल्टी में बर्बाद न की जाएं।

बॉन्डेड डॉक्टरों की शिकायत से हुआ खुलासा

इस पूरी अव्यवस्था का भंडाफोड़ तब हुआ, जब 7 अप्रैल 2026 को अनुबंधित (बॉन्डेड) चिकित्सा विशेषज्ञों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को बकायदा एक विस्तृत आवेदन सौंपा। डॉक्टरों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि वे अपने संबंधित विभागों (जैसे मेडिसिन, सर्जरी या गायनेकोलॉजी) में पहले से ही 24x7 'ऑन-कॉल' सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें “कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर” बनाकर जनरल शिफ्ट में बैठाया जा रहा है, जो उनके पद और विशेषज्ञता दोनों के साथ अन्याय है।

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MBBS डॉक्टरों की फौज होने के बाद भी मनमानी

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अस्पताल प्रबंधनों की कार्यप्रणाली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि संस्थानों में आपातकालीन सेवाओं को संभालने के लिए MBBS (बॉन्डेड और नियमित) डॉक्टर पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। नियमतः प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। इसके बावजूद सिविल सर्जनों द्वारा अपनी सुविधा और रोस्टर बनाने में आसानी के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों को इन कामों में धकेला जा रहा था।

मरीजों के इलाज और विशेषज्ञों की स्किल पर पड़ रहा था असर

इस गलत रोस्टर ड्यूटी का सबसे बड़ा खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा था। जब एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैजुअल्टी में सामान्य मरीजों को देखने या पोस्टमार्टम करने में उलझा रहेगा, तो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को वॉर्ड या ओपीडी में समय पर इलाज कैसे मिलेगा? डॉक्टरों ने अपने आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि विभागीय कार्यों से दूर रहने के कारण उनकी अपनी 'क्लिनिकल स्किल्स' भी कुंद हो रही हैं, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दीर्घकालिक रूप से एक बड़ा नुकसान है।

2019 के आदेश को भूल चुके थे अधिकारी

संचालनालय ने अपने ताजा पत्र में अधिकारियों को आईना दिखाते हुए 19 और 23 दिसंबर 2019 को जारी शासन के आदेश (क्रमांक एफ-1-36/2016/17-1) का कड़ाई से हवाला दिया है। उस आदेश में स्पष्ट निर्देश थे कि:

  कैजुअल्टी और 24 घंटे की इमरजेंसी ड्यूटी में सिर्फ MBBS चिकित्सा अधिकारी ही सेवाएं देंगे।

  विशेषज्ञ डॉक्टर केवल 'ऑन-कॉल' बुलाए जाने पर ही आएंगे।

  जरूरत पड़ने पर डिस्पेंसरी में पदस्थ डॉक्टरों की मदद ली जा सकती है, लेकिन विशेषज्ञों को सामान्य ड्यूटी में नहीं फंसाया जाएगा।

अब संचालनालय ने मांगी 'पालन रिपोर्ट

सालों से इस आदेश को ठेंगा दिखा रहे जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों पर अब नकेल कस दी गई है। स्वास्थ्य संचालनालय ने सभी CMHO और सिविल सर्जनों को अल्टीमेटम दिया है कि शासन के इन निर्देशों का तत्काल प्रभाव से और कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, व्यवस्था में सुधार कर इसकी 'पालन रिपोर्ट' (Compliance Report) शीघ्र संचालनालय को भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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