रायपुर में खारून नदी को बनाया मलबा डंपिंग ग्राउंड: ब्रिज मरम्मत के नाम पर बड़ा खेल, पर्यावरण और लोगों की जान खतरे में

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur की जीवनरेखा मानी जाने वाली Kharun River के साथ गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। खारून नदी पर बने ब्रिज की मरम्मत के दौरान ठेका कंपनी द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए नदी में डामर मिक्स मलबा डंप किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जनसुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

EXCLUSIVE: कैमरे में कैद हुआ पूरा खेल
हमारे पास मौजूद विजुअल्स में साफ दिखाई देता है कि ब्रिज से निकाला गया डामर और निर्माण मलबा सीधे नदी के भीतर डाला जा रहा है। नियमों के मुताबिक इस मलबे को ट्रकों के जरिए निर्धारित स्थान पर ले जाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाना चाहिए था, लेकिन यहां लागत बचाने के लिए सीधे नदी को ही डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है।

नदी के बीच बन रहा ‘मलबे का बांध’
तस्वीरों में यह भी स्पष्ट है कि नदी के बीचों-बीच मलबे के बड़े-बड़े टीले जमा हो चुके हैं। यह स्थिति अब सिर्फ प्रदूषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यहां स्टॉप डैम जैसी संरचना बनती दिख रही है, जो नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित कर सकती है और भविष्य में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।

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पर्यावरण और जनसुरक्षा दोनों पर खतरा
गर्मी के मौसम में जब जलस्तर कम होता है, तब इस तरह की डंपिंग नदी को गंभीर रूप से प्रदूषित कर सकती है। साथ ही, ब्रिज के नीचे से रोजाना स्थानीय लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में ऊपर से गिरता मलबा किसी बड़े हादसे को भी जन्म दे सकता है।

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नियमों की अनदेखी या सुनियोजित भ्रष्टाचार?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या ट्रांसपोर्टेशन लागत बचाने के लिए जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है? सरकारी नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि निर्माण मलबे का सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान जरूरी है। इसके बावजूद नदी में डंपिंग यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार या फंड के दुरुपयोग की आशंका है।

प्रशासन और NHAI की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासनिक चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या National Highways Authority of India के अधिकारी इस लापरवाही से अनजान हैं या फिर जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं? जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना भी चिंता का विषय है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज
यह मामला केवल तकनीकी लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित आर्थिक अनियमितता का भी संकेत देता है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी ठेका कंपनी व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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