अफसरशाही की भेंट चढ़ी रायपुर निगम की हेल्थ स्क्वॉड: विभागों के बीच फुटबॉल बनी फाइल, टेंडर होने के 4 महीने बाद भी योजना हवा-हवाई

अफसरशाही की भेंट चढ़ी रायपुर निगम की हेल्थ स्क्वॉड: विभागों के बीच फुटबॉल बनी फाइल, टेंडर होने के 4 महीने बाद भी योजना हवा-हवाई

रायपुर । राजधानी रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने और महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने वाली नगर निगम की एक बेहद अहम योजना अफसरों की लालफीताशाही में उलझ कर रह गई है। सड़कों पर खुले में कचरा फेंकने वालों पर लगाम कसने और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए 25 महिलाओं की 'हेल्थ स्क्वॉड' तैयार की जानी थी। लेकिन विडंबना यह है कि 21 लाख रुपये का टेंडर जारी होने के चार महीने बाद भी यह योजना निगम के दफ्तरों में एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही सफर कर रही है।

 

Read More रायपुर में बेलगाम बदमाशों का आतंक! शराब के पैसों के विवाद में युवक पर जानलेवा हमला, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

विभागीय फेरबदल और खींचतान ने लगाया पलीता

 

इस महत्वाकांक्षी योजना की दुर्गति की असली वजह निगम के भीतर चल रहा विभागीय फेरबदल है। एमआईसी (MIC) से मंजूरी मिलने के बाद, शुरुआत में स्क्वॉड बनाने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को दिया गया था। टेंडर भी निकाल दिया गया। लेकिन ऐन मौके पर योजना का प्रभार स्वास्थ्य विभाग से छीनकर 'नगर निवेश विभाग' को सौंप दिया गया। विभागों के इस ट्रांसफर-पोस्टिंग और समन्वय की कमी के खेल में पूरी योजना फाइलों में दब गई। नतीजा यह हुआ कि नई निविदा प्रक्रिया अब तक लटकी हुई है।

Read More CGMSC का गजब खेल: अस्पताल की ईंटों के पैसे से खरीदे उपकरण, 26 खातों में सड़ाए 261 करोड़, और वेतन पर ही उड़ा डाले 254 करोड़!

क्या था विजन, जो कागजों में दफन हो गया?

सामाजिक दबाव से सुधार:25 महिलाओं को फील्ड पर उतारना, ताकि बाजार और रिहायशी इलाकों में उनके दखल और सामाजिक दबाव से लोग कचरा सड़कों पर न फेंकें।

 डोर-टू-डोर मॉनिटरिंग:

घर-घर जाकर सूखा और गीला कचरा अलग करने के लिए नागरिकों को प्रेरित करना।

 

 दंडात्मक कार्रवाई में मदद: स्वच्छता नियमों की अनदेखी करने वालों को समझाइश देना और निगम के अमले का सहयोग करना।

पॉलिथीन बैन पर कार्रवाई शून्य, पर्यावरण विभाग के अधिकार भी बेकार

हेल्थ स्क्वॉड का एक सबसे बड़ा टास्क शहर में प्रतिबंधित पॉलिथीन पर रोक लगाना और जागरूकता फैलाना था। पर्यावरण विभाग ने निगम को जब्ती और जुर्माने के सारे अधिकार दे रखे हैं, लेकिन मैदानी अमले (स्क्वॉड) के अभाव में पॉलिथीन के खिलाफ कोई प्रभावी अभियान शुरू ही नहीं हो पाया। शहर की सड़कों से लेकर बाजारों तक प्रतिबंधित प्लास्टिक का बेखौफ उपयोग जारी है।

 

राजनीतिक मंजूरी के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती 

 

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि राजनीतिक नेतृत्व यानी एमआईसी से इसे बहुत पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बावजूद अधिकारियों की सुस्ती समझ से परे है। निगम के अधिकारी अब भी यही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं कि "टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही टीम फील्ड में तैनात कर दी जाएगी।" लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया कब पूरी होगी, इसका सटीक जवाब देने वा

ला निगम में कोई नहीं है।

Tags:

Latest News

सफाई में कथित लापरवाही पड़ी भारी! रेलवे परिसर में बिखरी यूरिया से तीन गौवंशों की मौत, लोगों में आक्रोश... सफाई में कथित लापरवाही पड़ी भारी! रेलवे परिसर में बिखरी यूरिया से तीन गौवंशों की मौत, लोगों में आक्रोश...
कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर पर BJP का नया पोस्टर अटैक! इस बार विधायक देवेंद्र यादव पर साधा निशाना
कवर्धा का कड़वा घूंट: मिलावटी शराब, नकली होलोग्राम और दो इंस्पेक्टरों को तबादले' का इनाम... आखिर सीधे-सादे आदिवासी सीएम को कौन कर रहा बदनाम?
पति को छुड़ाने के नाम पर ठगी! पैसे भेजने के बाद खुली ठगी की परत, पति का अब तक नहीं मिला सुराग, सूरजपुर पुलिस उलझी दोहरी गुत्थी में
भाजपा नेता पर हमले के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन! आरोपी के अवैध मकान पर चली जेसीबी
चलती पैसेंजर ट्रेन पर फिर पथराव! इंजन का टूटा शीशा, रेलवे सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
वजन घटाने के नाम पर करोड़ों की ठगी! गुरुग्राम में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, तीन महिलाएं गिरफ्तार
रायपुर में ट्रैफिक जवानों के लिए AC हेलमेट का ट्रायल शुरू: भीषण गर्मी से राहत देने वाली तकनीक की होगी परीक्षा
Japan Earthquake: जापान में फिर आया जोरदार भूकंप! 6.1 तीव्रता से हिली धरती, सुनामी का खतरा टला
Vivo X Fold 6 लॉन्च: 7000mAh बैटरी, 200MP Zeiss कैमरा और Dimensity 9500 Super प्रोसेसर के साथ आया नया फोल्डेबल फोन
बिना वजह घट रहा है वजन? नजरअंदाज न करें, हो सकता है किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत
CGMSC का गजब खेल: अस्पताल की ईंटों के पैसे से खरीदे उपकरण, 26 खातों में सड़ाए 261 करोड़, और वेतन पर ही उड़ा डाले 254 करोड़!