5 करोड़ की जमीन का फर्जी सौदा: 50 लाख ठगने वाले आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज
बिलासपुर | लिंक रोड स्थित पॉश इलाके की करोड़ों की जमीन का फर्जी तरीके से सौदा कर 50 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी प्रफुल्ल झा को बड़ा झटका लगा है। जिला न्यायालय की द्वितीय फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने पुलिस डायरी के साक्ष्यों और प्रार्थी की आपत्तियों को संज्ञान में लिया।
बिल्डर राजेश हर्जपाल ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, प्रफुल्ल झा ने खुद को नागपुर की रहने वाली बुजुर्ग महिला कृष्णा दुआ का 'मुख्तियार आम' बताया था। उसने झांसा दिया कि बुजुर्ग होने के कारण जमीन मालकिन बिलासपुर नहीं आ सकतीं।
इस विश्वास में आकर बिल्डर ने 4 करोड़ 94 लाख रुपए में उस बेशकीमती जमीन का सौदा तय कर लिया। बयाने के तौर पर राजेश ने प्रफुल्ल को 50 लाख रुपए नकद व चेक से सौंप दिए। रकम मिलने के बाद आरोपी रजिस्ट्री के नाम पर लगातार टालमटोल करने लगा। जब पीड़ित ने जांच की, तो बड़ा सच सामने आया। असल में मालकिन कृष्णा ने प्रफुल्ल को संपत्ति की केवल देखरेख करने का अधिकार दिया था, उसे बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। इसके बाद बिल्डर ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई।
गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख आरोपी ने कोर्ट की शरण ली, लेकिन शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेन्सेस्लास टोप्पो की अदालत ने उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया।
अग्रिम जमानत खारिज, फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बावजूद अब तक पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। यह कोई पहला मामला नहीं है जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में ऐसे कई रसूखदार और संगीन मामलों के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिन्हें पकड़ने से खाकी बचती नजर आ रही है।
हाल ही में छेड़छाड़ के गंभीर मामले में चकरभाठा पुलिस ने एलसीआईटी कॉलेज के प्रोफेसर को थाने तो लाया, लेकिन बिना ठोस कार्रवाई के उसे छोड़ दिया गया। इसी तरह, उसलापुर के पार्षद पति टंडन के खिलाफ बलात्कार जैसा संगीन आरोप लगा, लेकिन उस मामले को भी पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
