- Hindi News
- छत्तीसगढ़
- रायपुर में सोलर लाइट और ठेके के नाम पर 6 करोड़ की महाठगी विधायक को मंत्री बनाने के नाम पर भी ऐंठे ला...
रायपुर में सोलर लाइट और ठेके के नाम पर 6 करोड़ की महाठगी विधायक को मंत्री बनाने के नाम पर भी ऐंठे लाखों रुपए
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसे सुनकर असली जालसाज भी शर्मा जाएं. सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने और सरकारी ठेके दिलाने का लालच देकर कुछ शातिर ठगों ने शहर के कारोबारियों से 6 करोड़ 28 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी कर ली है. मजे की बात तो यह है कि इन ठगों का हौसला इतना बुलंद था कि इन्होने एक विधायक को लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाने और राज्यपाल से मिलवाने के नाम पर भी लाखों रुपए ऐंठ लिए. मामले की शिकायत रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की गई है.
शिकायतकर्ता और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज बैद ने रायपुर एसएसपी को दी गई अपनी लिखित शिकायत में बताया है कि उनके मित्र हेमेन्द्र चोपड़ा से मुख्य आरोपी राहुल शुक्ला की पुरानी जान पहचान थी. इसी पहचान का फायदा उठाकर ठगी का यह पूरा जाल बुना गया. इस गिरोह में मेसर्स जेनको फर्म की मालकिन रिधि जोशी उनके पति राहुल शुक्ला मदन देवांगन तुषार शाह नेहा जैन और हर्षवर्धन सिंह पूरी तरह शामिल बताए जा रहे हैं. इन्होने कारोबारियों को एक बहुत ही लुभावनी कहानी सुनाई कि वे ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का बड़ा ठेका दिलाएंगे. इनका दावा था कि पूरी कागजी कार्रवाई और काम की जिम्मेदारी इनकी होगी बस निवेशकों को पैसा लगाना है और मुनाफा कमाना है.
भरोसा जीतने का इनका तरीका किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था. जब नीरज बैद के एक क्लाइंट मनोज बोथरा ने काम की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया तो राहुल शुक्ला और तुषार शाह उन्हें सीधा बकावंड जनपद पंचायत के दफ्तर ले गए. वहां बाकायदा जनपद अध्यक्ष की कुर्सी पर एक महिला बैठी थी जिससे उनकी मुलाकात कराई गई. सरकारी दफ्तर और अध्यक्ष की कुर्सी देखकर किसी को भी विश्वास हो जाता. इन ठगों ने सरकारी कार्यालय को अपनी धोखाधड़ी की दुकान बना लिया था जिसमें जाहिर तौर पर कुछ सरकारी कर्मचारियों की भी मिलीभगत रही होगी.
इसी विश्वास में आकर मनोज बोथरा ने मार्च 2023 में ही अपनी दो फर्मों से 42 लाख रुपए जेनको फर्म के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से डाल दिए. ठगों ने वादा किया था कि 45 से 60 दिनों में सरकारी पैसा पास हो जाएगा और भारी मुनाफा मिलेगा. शिकार को जाल में पूरी तरह उलझाए रखने के लिए राहुल शुक्ला ने अप्रैल मई और अगस्त 2023 में बिना किसी बिल के दो तीन किश्तों में कुछ लाख रुपए मनोज बोथरा के खाते में वापस भी भेजे. यह चाल सिर्फ इसलिए चली गई ताकि निवेशकों को लगे कि सच में सरकारी खजाने से पैसा आ रहा है.
इस झांसे में फंसकर कई अन्य लोगों ने जेनको फर्म के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों में तीन करोड़ चौबीस लाख रुपए जमा कर दिए. लूट का यह खेल यहीं खत्म नहीं हुआ. इन शातिरों ने लेबर पेमेंट और सरकारी बाबुओं को खिलाने पिलाने के नाम पर एक करोड़ पचपन लाख चालीस हजार रुपए नकद भी वसूल लिए. जिन पीड़ितों ने अपने खर्च पर पंचायत इलाकों में लाइटें लगाईं उनका एक करोड़ अड़तालीस लाख तरेसठ हजार रुपए का नुकसान अलग से हुआ. इस तरह कुल मिलाकर छह करोड़ अठ्ठाइस लाख तीन हजार रुपए की सीधी चपत लगाई गई.
करीब तीस महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी जब मुनाफा तो दूर मूल रकम भी नहीं लौटी तो पीड़ितों ने खुद जांच पड़ताल शुरू की. तब जो सच सामने आया वह पैरों तले जमीन खिसकाने वाला था. पता चला कि बेमेतरा और मुंगेली जैसी जगहों पर जिन फर्जी आदेशों के दम पर 900 से ज्यादा सोलर लाइट लगा दी गईं वैसी कोई सरकारी स्वीकृति कभी जारी ही नहीं हुई थी. संबंधित जनपद सीईओ ने साफ कह दिया कि जब काम ही मंजूर नहीं हुआ तो भुगतान का सवाल ही नहीं उठता. इन ठगों ने बाकायदा फर्जी सरकारी कार्य आदेश और फर्जी कार्य संतुष्टि प्रमाण पत्र छाप कर लोगों की गाढ़ी कमाई डकार ली.
अब इस पूरे घोटाले में एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक एंगल भी सामने आ रहा है. सूत्रों के अनुसार इस गैंग का मुख्य मोहरा मदन देवांगन सिर्फ सोलर लाइट तक सीमित नहीं था. वह विधायकों को मंत्री बनाने का ठेका भी लेता था. खबर है कि उसने एक विधायक को मलाईदार पीडब्ल्यूडी विभाग का मंत्री बनाने का झांसा देकर भारी भरकम रकम वसूल ली. इतना ही नहीं उसी विधायक को राज्यपाल से मिलवाने और मंत्री पद की सिफारिश करवाने के नाम पर पच्चीस लाख रुपए अलग से ऐंठ लिए गए. ये जालसाज अपने आप में एक अलग ही समानांतर सरकार चला रहे थे जो ठेके से लेकर मंत्री पद तक सब कुछ बेच रहे थे.
अब थक हारकर पीड़ितों ने एसएसपी रायपुर का दरवाजा खटखटाया है. इन्होने अपनी शिकायत में मांग की है कि जुलाई 2023 से सितंबर 2025 तक का दो प्रतिशत प्रतिमाह का ब्याज और मुनाफा जोड़कर करीब साढ़े तेरह करोड़ रुपए की वसूली इन ठगों से करवाई जाए. साथ ही सरकारी दफ्तरों का दुरुपयोग करने और सरकारी मुहरों व दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में इन सभी के खिलाफ सख्त आपराधिक मामला दर्ज किया जाए. अब देखना दिलचस्प होगा कि रायपुर पुलिस इन हाई प्रोफाइल जालसाजों को कब तक सलाखों के पीछे भेजती है या फिर ये कोई नया सरकारी दफ्तर खोलकर किसी अन्य नेता को मुख्यमंत्री बनाने का ठेका लेने निकल पड़ते हैं.
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
