बड़े साहब का आदेश है, 2-2 लाख दो': सिंचाई विभाग में रिटायरमेंट से पहले बंपर 'वसूली', भोलेनाथ पर गंभीर आरोप, क्या ऊपर जा रहा पैसा?
रायपुर। नवा रायपुर के मंत्रालय और विभागाध्यक्ष भवन (महानदी) के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा जोरों पर है— "क्या रिटायरमेंट से पहले 'झोला' भरने की तैयारी चल रही है? मामला प्रदेश के सिंचाई विभाग (जल संसाधन विभाग) का है, जहां एक कथित वसूली मॉडल ने मैदानी इंजीनियरों की नींद उड़ा रखी है। विभाग के भीतर मचे इस बवाल के केंद्र में हैं (बदला हुआ नाम -भोलेनाथ हैं जिन पर आरोप है कि वे अपनी विदाई से ठीक पहले करोड़ों की उगाही का एक बड़ा खेल रच रहे हैं।
नियुक्ति का दूसरा महीना और कलेक्शन' का फरमान
दरअसल, भोलेनाथ का मूल कार्यकाल 2 माह में खत्म होने वाला है । विभाग में उनके निलंबन की फाइल दौड़ी थी , मगर उसकी जगह उन्हें पुरस्कार मिला हुआ है। इस नियुक्ति अब दूसरा महीना चल रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जाते-जाते एक ऐसा टारगेट सेट कर दिया गया है, जिसने फील्ड अफसरों के पसीने छुड़ा दिए हैं। आरोप है कि विभाग के सभी 55 डिवीजनों के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (EE) और अधीक्षण अभियंताओं (SE) के पास लगातार फोन घनघनाए जा रहे हैं। संदेश बिल्कुल साफ और दो टूक है—भोलेनाथ साहब का निर्देश है, हर डिवीजन से 2-2 लाख रुपये की व्यवस्था तुरंत करनी होगी।
अगर गणित लगाएं तो 55 डिवीजनों से दो-दो लाख रुपये के हिसाब से यह रकम सीधे-सीधे 1 करोड़ 10 लाख रुपये बैठती है।
ऊपर देना है...और अफसरों की बगावत
इस पूरी कथित वसूली में सबसे दिलचस्प और गंभीर पहलू वह 'हवाला' है जो फोन पर दिया जा रहा है। पैसा मांगने वाले खुलेआम कह रहे हैं कि यह रकम "ऊपर तक पहुंचानी है।" अब यह 'ऊपर' कौन है, यह तो जांच का विषय है, लेकिन इस डिमांड से मैदानी अमले में भारी आक्रोश है।
खबर है कि इस 'टैक्स' से परेशान होकर हाल ही में 10 से 12 अधिकारियों का एक समूह रायपुर स्थित मुख्यालय जा पहुंचा। इन अफसरों ने इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था कर पाने में साफ तौर पर अपनी असमर्थता जताई। लेकिन, वहां बैठे साहब के खासमखास लोगों ने उन्हें बैरंग लौटाते हुए सख्त लहजे में कह दिया भैया, साहब का आदेश है, देना तो पड़ेगा।
निजी उगाही या वाकई कोई 'ऊपरी' दबाव?
सिंचाई विभाग के भीतर अब इस बात को लेकर कानाफूसी तेज हो गई है कि क्या यह सचमुच किसी ऊपरी निर्देश का हिस्सा है या फिर नौकरी के बचे हुए दिनों में अपना 'रिटायरमेंट फंड' मजबूत करने की कोई निजी जुगत भिड़ाई जा रही है।
हालांकि, अभी तक इन आरोपों की किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोई अफसर खुलकर कैमरे के सामने बोलने को तैयार है। लेकिन 'बिना आग के धुआं नहीं उठता' की तर्ज पर इस कथित वसूली अभियान ने विभाग में भारी नाराजगी और दबाव का माहौल पैदा कर दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के कानों तक यह भनक पहुंचने के बाद कोई एक्शन होता है, या फिर साहब अपना 'टारगेट' पूरा करके आराम से विदाई ले लेते हैं।
