सड़क पर 'मौत' का खंभा: रवींद्रनाथ टैगोर वार्ड में रसूखदार की मनमानी का विरोध; बिना अनुमति लगाए जा रहे ट्रांसफार्मर पर बवाल, पार्षद के दखल से रुका काम
रायपुर। राजधानी के वार्ड क्रमांक 55 (रवींद्रनाथ टैगोर वार्ड) के रहवासियों के लिए इन दिनों उनका ही इलाका किसी खौफ से कम नहीं रह गया है। वजह है- वार्ड के मुख्य और व्यस्त मार्ग पर बिना किसी पूर्व अनुमति के लगाया जा रहा एक हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसफार्मर। एक निजी फैक्ट्री संचालक की इस मनमानी के खिलाफ जब जनता ने आवाज उठाई और बिजली विभाग से लेकर नगर निगम तक शिकायत के दस्तावेज सौंपे, तो सिस्टम ने पूरी तरह से आंखें मूंद लीं। आखिरकार, जब लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा, तब जाकर वार्ड पार्षद को हस्तक्षेप करना पड़ा और फिलहाल के लिए काम रोक दिया गया है।
बच्चों और बुजुर्गों की जान दांव पर, प्रशासन मौन
यह पूरा विवाद वार्ड स्थित एक पुरानी मसाला फैक्ट्री के ठीक सामने का है। यहां एक अन्य फैक्ट्री संचालक द्वारा अपनी सुविधानुसार मुख्य सड़क के बीचों-बीच ट्रांसफार्मर और बिजली का खंभा गाड़ने की तैयारी चल रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क इलाके की लाइफलाइन है। यहां दिनभर मोहल्ले के छोटे बच्चे खेलते रहते हैं और सुबह-शाम बुजुर्ग टहलने निकलते हैं। ऐसे घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके के बीचों-बीच खुला ट्रांसफार्मर लगाना किसी बड़ी और जानलेवा दुर्घटना को सीधा न्योता देने जैसा है। रहवासियों का आरोप है कि रसूखदार फैक्ट्री संचालक उनकी जायज आपत्तियों को दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपना रहा है सिर्फ ट्रांसफार्मर नहीं, इन 3 बड़ी समस्याओं से भी त्रस्त है वार्ड
कृष्णा नगर, दावड़ा कॉलोनी, लालपुर, सिंचाई कॉलोनी, वॉलफोर्ट एन्क्लेव, एमएमआई क्षेत्र, रामकृष्ण हॉस्पिटल, हनुमान नगर और कमल विहार जैसे अहम इलाकों को समेटने वाला यह वार्ड इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 'मौत के खंभे' के खौफ के अलावा, ये तीन बुनियादी समस्याएं भी लोगों का जीना मुहाल कर रही हैं:
सूखे पड़े नल (पेयजल संकट): इलाके में पानी की त्राहि-त्राहि मची है। लोगों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है और निगम की सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
कचरे का सड़ांध मारता अंबार (सफाई व्यवस्था)
वार्ड की गलियों में गंदगी पटी पड़ी है। हफ्तों तक कचरे का नियमित उठाव नहीं होने से पूरे इलाके में सड़ांध है और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
अंधेरे में डूबी सड़कें (स्ट्रीट लाइट):
दिखावे के लिए बिजली के खंभे तो हैं, लेकिन उनमें लगी लाइटें लंबे समय से खराब हैं। रात ढलते ही पूरा वार्ड घुप अंधेरे में डूब जाता है, जिससे हादसों और असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
लगातार बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए वार्ड पार्षद विनय प्रताप सिंह ध्रुव ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पार्षद ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत प्रभाव से ट्रांसफार्मर लगाने का काम रुकवा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, वार्डवासियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रहवासियों की शिकायत के आधार पर फिलहाल काम तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है। जल्द ही दोनों पक्षों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर इस पर चर्चा की जाएगी। बीच सड़क पर जनता की जान जोखिम में डालकर कोई भी निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
