बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य प्रशासन से मांगा जवाब

बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य प्रशासन से मांगा जवाब

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई गंभीर घटना ने देश की शीर्ष अदालत को भी झकझोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे कानून व्यवस्था पर सीधा हमला बताया और राज्य प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं।

न्यायिक अधिकारियों के साथ बदसलूकी पर कोर्ट नाराज
घटना के अनुसार, सात न्यायिक अधिकारियों जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं को घंटों तक असुरक्षित परिस्थितियों में रखा गया। उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा दी गई और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

“यह प्रशासन की विफलता”, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि घटना की पूर्व जानकारी होने के बावजूद प्रशासन समय पर कार्रवाई करने में विफल रहा। कोर्ट ने इसे राज्य सरकार की कार्यप्रणाली की बड़ी कमी बताया। पीठ ने टिप्पणी की कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें गंभीर चूक हुई है।

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मुख्य सचिव से लेकर DGP तक को नोटिस
मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि जब स्थिति की जानकारी पहले से थी, तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

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चुनावी प्रक्रिया में बाधा बर्दाश्त नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि SIR (Special Intensive Revision) जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह केंद्रीय बलों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और आवश्यक होने पर आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अधिकारियों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभावित न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा का तुरंत आकलन किया जाए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि न्यायिक व्यवस्था की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

अगली सुनवाई में देनी होगी पूरी रिपोर्ट
सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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