कश्मीर में आतंक के मददगारों पर शिकंजा: सोपोर में एक साथ 15 जगहों पर पुलिस रेड, भारी मात्रा में सामग्री जब्त
श्रीनगर। Sopore में आतंकवाद और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा अभियान चलाते हुए प्रतिबंधित संगठन Jamaat-e-Islami से जुड़े 15 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। Jammu and Kashmir Police की ओर से की गई इस कार्रवाई को घाटी में सक्रिय आतंकी तंत्र और उसके समर्थन नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार यह अभियान गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामले की जांच के सिलसिले में चलाया गया।
पुलिस ने बताया कि सोपोर थाना में दर्ज FIR संख्या 42/2025 के तहत यह कार्रवाई की गई, जिसमें UAPA की धारा 10 और 13 के तहत जांच चल रही है। तलाशी अभियान जामिया कदीम, नसीम बाग, वारपोरा, बोमाई, अमरगढ़, तारज़ू और क्रांकशिवन समेत कई संवेदनशील इलाकों में चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने अदालत से विधिवत तलाशी वारंट लेने के बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। तलाशी के दौरान कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा साहित्य और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके समर्थकों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के मुताबिक यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के आर्थिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है। इसी कड़ी में हाल ही में करीब 20 लाख रुपये की एक संपत्ति भी कुर्क की गई थी, जो कथित तौर पर पाकिस्तान और Pakistan-occupied Kashmir से संचालित एक आतंकी हैंडलर से जुड़ी बताई गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी माजिद अहमद सोफी उर्फ ‘बिसाती’ Hizbul Mujahideen से जुड़ा हुआ है और घाटी में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस का दावा है कि वह पाकिस्तान और PoK से आतंकी नेटवर्क संचालित कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि आतंकवाद के लिए फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ आने वाले समय में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
घाटी में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बीच पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारों से नहीं, बल्कि उसके आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क को तोड़कर ही निर्णायक रूप से जीती जा सकती है।
