कलकत्ता हाई कोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी: ‘चोर-चोर’ के नारों से गूंजा परिसर, धक्का-मुक्की से बढ़ा सियासी तापमान
कोलकाता। Mamata Banerjee को आज Calcutta High Court परिसर में अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत पहुंचीं ममता बनर्जी को कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय वकीलों के एक समूह ने घेर लिया। इस दौरान उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए और माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विरोध के दौरान धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे कुछ देर के लिए हाई कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
ममता बनर्जी खुद इस मामले में अधिवक्ता के रूप में अदालत में मौजूद थीं। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि West Bengal कोई “बुलडोजर स्टेट” नहीं है और राज्य में कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अदालत परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। ममता ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से मामलों को देखने के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। वहीं पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि चुनाव के बाद हुई घटनाओं में लगातार कार्रवाई की जा रही है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए गए हैं।-1778747931563.png)
यह मामला चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी उस जनहित याचिका से संबंधित है, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Sujay Paul की पीठ कर रही थी। याचिका अधिवक्ता शीर्षान्य बनर्जी द्वारा दायर की गई थी। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद राज्य के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी और राजनीतिक टकराव की घटनाएं सामने आई थीं। इन्हीं घटनाओं को लेकर विभिन्न याचिकाएं अदालत में लंबित हैं।
घटना के बाद All India Trinamool Congress ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट जारी कर ममता बनर्जी का समर्थन किया। पार्टी ने उन्हें “संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा” बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी वह बंगाल की जनता के साथ मजबूती से खड़ी रहती हैं। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक ड्रामा” करार देते हुए चुनावी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग दोहराई है।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में कानून की पढ़ाई पूरी की थी और उनके पास कला, शिक्षा तथा राजनीति से जुड़ी कई शैक्षणिक डिग्रियां हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाई कोर्ट में उनकी मौजूदगी सिर्फ कानूनी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इस घटना के बाद बंगाल की राजनीति में सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
