भारत के ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा असर: लश्कर में फूट, चीन-अमेरिका बना विवाद की जड़
नई दिल्ली: भारतीय खुफिया एजेंसियों की ताज़ा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के भीतर गंभीर फूट पड़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस फूट के पीछे भारत का ऑपरेशन सिंदूर और चीन-अमेरिका की रणनीतियों से जुड़े निर्णय एक अहम कारण हैं।
ऑपरेशन सिंदूर ने बदला संगठन का नक्शा
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेताओं और संगठन की नीतियों में मतभेद बढ़ गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संगठन ने अपना बुनियादी ढांचा का एक बड़ा हिस्सा खो दिया और इसके बाद संगठन को फिर से जोड़ पाना मुश्किल हो गया। कई सदस्य अब आईएसआई और पाकिस्तानी सेना पर भरोसा नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अब वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाएंगे।
चीन-अमेरिका के दबाव ने बढ़ाई नाराजगी
खुफिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेताओं को लगता है कि पाकिस्तान सरकार चीन और अमेरिका की मांगों को अत्यधिक महत्व दे रही है। दोनों देश विशेष रूप से बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों पर नजर रखे हुए हैं।
पाकिस्तानी सेना ने तेहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) और बलूचिस्तान मुक्ति सेना (बीएलए) के खिलाफ लड़ाई के लिए आईएस के खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) को शामिल किया और उसे लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने का निर्णय लिया। संगठन के भीतर यह निर्णय विवाद का कारण बन गया है, क्योंकि शीर्ष नेताओं का सवाल है कि क्या उन्हें अब पाकिस्तान और पश्चिमी देशों के हितों की रक्षा के लिए अपने ही लोगों से लड़ना चाहिए।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह फूट पाकिस्तान में आतंकवादी नेटवर्क की कमजोरी को उजागर करती है। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल संगठन की क्षमता को प्रभावित किया, बल्कि पाकिस्तान में चीन-अमेरिका के दबावों के चलते उसकी रणनीतिक स्थिरता पर भी प्रश्न खड़ा कर दिया है।
