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रेत माफिया का खेल: हर 10 मिनट में निकल रहा बिना नंबर का ट्रैक्टर, और विभाग 'कुंभकर्णी नींद' में
बिलासपुर. जिले में बिलासपुर से लेकर बेलगहना तक इन दिनों रेत माफियाओं का खुला राज चल रहा है। कोनचरा और करहीकछार घाटों का हाल तो यह है कि हर 10 मिनट में रेत से भरा एक ट्रैक्टर यहां से फर्राटे भरते हुए निकल रहा है। खनिज विभाग और प्रशासन को शायद यह सब नजर नहीं आता। या यूं कहें कि आंखों पर पट्टी बांधने में उन्हें महारत हासिल हो चुकी है। दिखावे के लिए तीन दिन में 11 गाड़ियां पकड़कर विभाग ने अपनी पीठ जरूर थपथपाई है, लेकिन घाटों पर माफियाओं का असली खेल दिन-रात बेरोकटोक जारी है।
मीडिया रिपोर्ट में प्रशासन की इस 'सख्ती' की पोल खुल गई है।
बिना नंबर की गाड़ियों से हो रही सप्लाई
मीडिया टीम जब मौके पर पहुंची तो देखा कि रेत माफियाओं को किसी का डर नहीं है। घाट से जो गाड़ियां रेत भरकर निकल रही हैं, उनमें से ज्यादातर पर नंबर प्लेट तक नहीं है। बिना नंबर के इन ट्रैक्टरों से बेखौफ सप्लाई हो रही है, ताकि अगर कभी कोई अधिकारी नींद से जाग भी जाए, तो यह पता न चले कि गाड़ी किसके नाम पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए, तो पूरे साल यहां अवैध रेत खनन चलता है। सुबह से लेकर शाम तक ट्रैक्टरों की लाइन लगी रहती है। रात के अंधेरे में भी यह धंधा बंद नहीं होता। कोनचरा और करहीकछार के अलावा आमागोहन, खोड़ी, खोंगसरा, जरगा, पकरिया, पीपरखुंटी, केंवची और ठाड़पथरा में भी अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
हादसे के इंतज़ार में प्रशासन?
नियम-कानून तो छोड़िए, यहां तो मजदूरों की जान की भी कोई फिक्र नहीं है। घाट से निकलने वाले लगभग हर ट्रैक्टर में रेत के ढेर के ऊपर मजदूर बैठे दिखाई देते हैं। ड्राइवर तेज रफ्तार में ट्रैक्टर दौड़ाता है और मजदूर ऊपर हिचकोले खाते रहते हैं। देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रशासन किसी बड़े हादसे का ही इंतजार कर रहा है। शायद जब कोई मजदूर गिरकर जान गंवाएगा, तब जाकर कोई जांच कमेटी बनाई जाएगी। ग्रामीणों ने कई बार इसकी जानकारी प्रशासन को दी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 'खानापूर्ति'
लगातार उठ रहे सवालों के बीच खनिज विभाग ने हाल ही में थोड़ी फुर्ती दिखाई।
- क्या हुई कार्रवाई: कलेक्टर के निर्देश पर 11, 12 और 13 मार्च को टीम ने निरतु, लोफंदी, लछनपुर और रतनपुर समेत कई इलाकों में जांच की।
- क्या मिला: तीन दिनों में 5 हाइवा और 6 ट्रैक्टर (कुल 11 वाहन) जब्त किए गए हैं।
- कहां रखे गए वाहन: इन सभी गाड़ियों को कोनी थाने और लावर जांच चौकी भेज दिया गया है।
विभाग ने 11 गाड़ियां पकड़कर यह जताने की पूरी कोशिश की है कि वह बहुत काम कर रहा है। लेकिन जरा सोचिए, जिस इलाके में हर 10 मिनट में एक ट्रैक्टर रेत चोरी हो रही हो, वहां तीन दिन की कड़ी मेहनत के बाद सिर्फ 11 गाड़ियों का पकड़ा जाना क्या यह नहीं बताता कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है?
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
