एनएमडीसी में लौह अयस्क तस्करी पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार: नंबर टेकर बर्खास्त, 8 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज
57 की जगह 59 वैगनों का रैक भेजने का महाघोटाला; सीबीआई, विजिलेंस और रिटायर्ड आईएएस की जांच के बाद प्रबंधन का सख्त रुख
बचेली। सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न खनन कंपनी एनएमडीसी (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम) में लौह अयस्क की कथित तस्करी और बड़े पैमाने पर हेराफेरी के मामले में प्रबंधन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। अक्टूबर 2025 में लौह अयस्क से भरी एक मालगाड़ी (रैक) में निर्धारित 57 वैगनों के स्थान पर गुपचुप तरीके से 59 वैगन भेजे जाने के इस सनसनीखेज मामले में कंपनी ने एक नंबर टेकर को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा 5 अधिकारियों का आनन-फानन में स्थानांतरण किया गया है, जबकि 3 अन्य कर्मचारियों की वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगा दी गई है। प्रबंधन की इस 'जीरो टॉलरेंस' वाली कार्रवाई से पूरे एनएमडीसी महकमे और खदान क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
यूं खुला तस्करी का राज और हुई उच्चस्तरीय जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा वाकया अक्टूबर 2025 का है। बचेली स्थित लोडिंग प्लांट से लौह अयस्क की रैक रवाना होनी थी। कागजों में 57 वैगनों की अनुमति और एंट्री थी, लेकिन हेराफेरी कर दो अतिरिक्त वैगनों को रैक में जोड़कर करोड़ों का अयस्क पार करने की कोशिश की गई। इस गंभीर अनियमितता की भनक लगते ही एनएमडीसी के विजिलेंस (सतर्कता) विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हैदराबाद मुख्यालय से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बचेली पहुंचा। निष्पक्ष जांच के लिए रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम भी गठित की गई। इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्रालय के कड़े निर्देशों के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस बहुचर्चित मामले की तफ्तीश की। सभी जांच रिपोर्टों में दो अतिरिक्त वैगनों के जरिए लौह अयस्क के अवैध परिवहन की स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन
जांच एजेंसियों की पुख्ता रिपोर्ट के आधार पर एनएमडीसी प्रबंधन ने बिना कोई ढील दिए रैक लोडिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात नंबर टेकर एम. नागेश्वर राव को सीधे नौकरी से बर्खास्त कर दिया। वहीं, लापरवाही और संलिप्तता के आरोप में अन्य 8 संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर ट्रांसफर और पदोन्नति व इंक्रीमेंट रोकने जैसी गाज गिरी है। हालांकि, आरोपी कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने के भीतर अपील करने का समय दिया गया है, लेकिन विभागीय सूत्रों का स्पष्ट मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है।
क्या 'बड़ी मछलियों' को बचाया जा रहा है?
इस आक्रामक कार्रवाई के बावजूद कई गंभीर सवाल अब भी खदान की धूल में तैर रहे हैं। दबी जुबान में कर्मचारी और श्रमिक संगठन सवाल उठा रहे हैं कि क्या छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर असली 'बड़ी मछलियों' को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है? सबसे बड़ा संदेह इस बात पर है कि घटना वाले दिन प्लांट के सीसीटीवी कैमरे संदिग्ध परिस्थितियों में बंद पाए गए थे, जो पूर्व में हुई स्क्रैप चोरी की घटनाओं की हूबहू याद दिलाते हैं। बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के रैक में दो वैगन अतिरिक्त जोड़ना और उसे पास कराना संभव ही नहीं है। ऐसे में रेलवे विभाग, लोडिंग प्लांट इंचार्ज, एनएमडीसी के कमर्शियल विभाग और रेलवे के अधिकारियों के बीच एक बड़े नेक्सस (गठजोड़) की आशंका प्रबल हो गई है।
