एअर इंडिया विमान हादसे का रहस्य बरकरार! अमेरिका भेजे गए इंजन, एक साल बाद भी नहीं आई अंतिम रिपोर्ट
नई दिल्ली। अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया बोइंग 787 विमान हादसे को एक साल पूरा होने वाला है, लेकिन इस भीषण दुर्घटना के कारणों पर अब भी पूरी तरह से पर्दा नहीं उठ पाया है। 260 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट तय समय सीमा के भीतर जारी नहीं हो सकेगी। जांच एजेंसियां अब भी कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की पड़ताल में जुटी हुई हैं, जिसके चलते रिपोर्ट में देरी हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) जल्द एक स्टेटस रिपोर्ट जारी कर सकता है, जिसमें अब तक हुई जांच और देरी के कारणों की जानकारी दी जाएगी। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट अगले कुछ महीनों में सामने आ सकती है। इस बीच जांच में अमेरिका की कई एजेंसियां और विमान निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी सहयोग कर रही हैं।
हादसे की जांच का सबसे अहम हिस्सा विमान के इंजनों का विश्लेषण माना जा रहा है। इंजन और उससे जुड़े उपकरणों की विस्तृत जांच अमेरिका में की जा रही है, क्योंकि इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों की आवश्यकता है। जांच में अमेरिकी राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड, बोइंग और जीई एयरोस्पेस जैसे संस्थान भी शामिल हैं, जो तकनीकी कारणों की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद विमान के दोनों इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच 'रन' से 'कटऑफ' मोड में चले गए थे, जिससे ईंधन की आपूर्ति रुक गई और इंजन बंद हो गए। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह किसी तकनीकी खराबी का परिणाम था या मानवीय त्रुटि की वजह से ऐसा हुआ। जांचकर्ता रैम एयर टर्बाइन (RAT) के सक्रिय होने के समय और संभावित इलेक्ट्रिकल फेलियर की भी जांच कर रहे हैं।
जांच में एक और बड़ी चुनौती विमान के क्षतिग्रस्त रिकॉर्डर हैं। जहां एक रिकॉर्डर से डेटा हासिल कर लिया गया है, वहीं दूसरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण विश्लेषण में मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर के सक्रिय न होने और विमान के नेटवर्क सिस्टम में पहले से मौजूद तकनीकी समस्याओं की भी समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही उड़ान AI-171 उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें विमान में सवार 241 लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी।
