हे भगवान सब लुट गया, न्याय नहीं दे सकते तो मुझे मर जाने दो...87 साल की बेसहारा बुजुर्ग का छलका दर्द, पति-बेटों की मौत के बाद पंच ने हड़पे 23 लाख और जमीन.. अब दर-दर भटकने को मजबूर
बिलासपुर। सुशासन के दावे उस वक्त बेमानी और खोखले नजर आए, जब 87 साल की एक कांपती लड़खड़ाती हुई बुजुर्ग महिला सिस्टम से पूरी तरह हारकर सुशासन शिविर में पहुंची। उसके हाथों में न्याय की गुहार नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी खत्म करने का आवेदन था। यह दर्दनाक दास्तान है बेलगहना ग्राम पंचायत की रहने वाली बालकुंवर बसोर की, जिनके पति और दो बेटों का साया उठने के बाद एक जालसाज ने उनकी जिंदगी भर की पूंजी, जमीन और यहां तक कि जीने की उम्मीद भी छीन ली।
बालकुंवर की आंखें अब सूख चुकी हैं और उनकी जुबान पर सिर्फ एक ही बात है- साहब! जब सिस्टम और सरकार मुझे मेरा हक नहीं दिला सकता, तो मुझे चैन से मरने की इजाजत ही दे दो।
अपनों के चले जाने के बाद मिला सिर्फ धोखा
बालकुंवर की कहानी किसी को भी झकझोर कर रख देने वाली है। पति स्व. गंगाराम बसोर और दोनों बेटों की मौत के बाद वह इस दुनिया में नितांत अकेली रह गई थीं। उम्र के इस पड़ाव पर जब उन्हें सहारे की जरूरत थी, तब केंदा निवासी भाजपा समर्थित पंच फागुन प्रसाद प्रजापति (उर्फ मोनू) ने हमदर्द बनकर उनकी जिंदगी में एंट्री ली। उसने बुजुर्ग महिला के अकेलेपन का फायदा उठाया और मदद का भरोसा दिलाकर उनका विश्वास जीत लिया।
बैंक केवाईसी के नाम पर रची गई हड़पने की साजिश
हमदर्द का मुखौटा पहने फागुन प्रसाद ने 87 साल की बुजुर्ग को बैंक में केवाईसी अपडेट कराने की बात कही। बालकुंवर, जो उसे अपना बेटा समझ बैठी थीं, उसके बुने जाल में फंस गईं।
14 दिसंबर 2021 को आरोपी ने कथित तौर पर उनके स्टेट बैंक खाते से 23 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए।
ग्राम पंचायत लूफा स्थित खसरा नंबर 763 और 991/2 की करीब 6.18 एकड़ (2.5 हेक्टेयर) कृषि भूमि भी धोखाधड़ी से अपने नाम करा ली।
आरोप है कि घर में रखा जीवन भर की कमाई का सोना-चांदी भी जालसाज ले उड़ा।
तत्कालीन एसडीओपी पर गंभीर आरोप: 2 लाख लेकर काट दिया फेना
बेसहारा बुजुर्ग जब लुटने के बाद न्याय की आस में पुलिस के पास पहुंची, तो वहां भी उसे सिस्टम की गंदगी का शिकार होना पड़ा। बालकुंवर ने पुलिस चौकी बेलगहना, कोटा एसडीओपी कार्यालय और बिलासपुर एसपी कार्यालय के अनगिनत चक्कर काटे। आरोप है कि महिला एसडीओपी ने लंबे समय तक जांच के नाम पर उन्हें सिर्फ घुमाया। हद तो तब हो गई जब पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपी पक्ष से दो लाख रुपए लेकर इस गंभीर मामले को हस्तक्षेप अयोग्य बताकर धारा 174 के तहत अंतिम प्रतिवेदन फेना काट दिया और 87 साल की बुजुर्ग को कोर्ट का रास्ता दिखा दिया।
अफसरों तक पैसा पहुंचाता हूं...और फिर मांगी मौत
पुलिस से निराश होकर बालकुंवर गुरुवार को आईजी रामगोपाल गर्ग से मिलने पहुंचीं, लेकिन मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने डीएसपी विवेक शर्मा को अपनी आपबीती और इच्छामृत्यु का ज्ञापन सौंपा।
अपने मार्मिक पत्र में बालकुंवर लिखती हैं- मैं एक असहाय बेसहारा बुजुर्ग महिला हूं। आरोपी ने केवल मेरी जमीन और पैसे ही नहीं हड़पे, बल्कि घर आकर मुझे जान से मारने की धमकी देता है। वह सरेआम कहता है कि थाने से लेकर बड़े अफसरों तक वह पैसा पहुंचाता है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पुलिस और प्रशासन के चक्कर काटते-काटते मैं टूट चुकी हूं। अगर प्रशासन मुझे न्याय नहीं दे सकता, तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मुझे इच्छामृत्यु की अनुमति दे दें।
