Vivah Muhurat 2026: अधिकमास खत्म होते ही बजेगी शहनाई, 21 जून से शुरू होंगे विवाह, जून-जुलाई में मिलेंगे 12 शुभ मुहूर्त

Vivah Muhurat 2026: अधिकमास खत्म होते ही बजेगी शहनाई, 21 जून से शुरू होंगे विवाह, जून-जुलाई में मिलेंगे 12 शुभ मुहूर्त

Shubh Vivah Muhurat 2026: अधिकमास के समापन के साथ ही एक बार फिर शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होने जा रही है। 17 मई 2026 से आरंभ हुआ अधिकमास 15 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद 21 जून से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों पर लगी धार्मिक रोक हट जाएगी। ऐसे में जिन परिवारों ने अधिकमास के कारण अपने विवाह समारोह स्थगित किए थे, उनके लिए यह खुशखबरी है। पंचांग के अनुसार जून और जुलाई 2026 में विवाह के लिए कुल 12 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

अधिकमास में क्यों नहीं होते विवाह?
सनातन धर्म में अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु की भक्ति, जप, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। माना जाता है कि यह महीना आत्मिक उन्नति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ होता है। अधिकमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा की जाती है।

जून 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
अधिकमास समाप्त होने के बाद जून महीने में विवाह के लिए कुल 8 शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी।

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जून 2026 के शुभ विवाह मुहूर्त:

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  • 21 जून 2026
  • 22 जून 2026
  • 23 जून 2026
  • 24 जून 2026
  • 25 जून 2026
  • 26 जून 2026
  • 27 जून 2026
  • 29 जून 2026

इन तिथियों पर शुभ लग्न और ग्रह-नक्षत्रों के संयोग के आधार पर विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं।

जुलाई 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
जुलाई महीने में विवाह के लिए कुल 4 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं।

जुलाई 2026 के शुभ विवाह मुहूर्त:

  • 1 जुलाई 2026
  • 6 जुलाई 2026
  • 7 जुलाई 2026
  • 11 जुलाई 2026

हालांकि जुलाई में मुहूर्तों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से ये तिथियां विवाह के लिए शुभ मानी जा रही हैं।

विवाह में शुभ मुहूर्त का महत्व
हिंदू धर्म में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र मिलन माना जाता है। इसलिए विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का चयन विशेष महत्व रखता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ मुहूर्त में संपन्न विवाह से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि, प्रेम और स्थिरता बनी रहती है। मुहूर्त निर्धारण करते समय तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति का गहन अध्ययन किया जाता है।

विवाह की तारीख तय करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

  • केवल पंचांग में बताए गए मुहूर्त पर निर्भर न रहें।
  • वर और वधू की जन्म कुंडली का मिलान जरूर कराएं।
  • व्यक्तिगत ग्रह दशा और गोचर की भी जांच करवाएं।
  • योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेकर अंतिम तिथि तय करें।

Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार मुहूर्तों में अंतर संभव है। किसी भी शुभ कार्य से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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