NJV EXCLUSIVE: 3200 करोड़ के शराब घोटाले में पपेट और पपेटियर का डर्टी गेम! मामूली एकाउंटेंट को बनाया डमी डायरेक्टर, बैकडोर से सिंडिकेट ने डकारे करोड़ों
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में अब तक आपने 'बड़ी मछलियों' के नाम सुने होंगे, लेकिन अब जो खुलासे हो रहे हैं, वो बताते हैं कि इस महाघोटाले का ताना-बाना कितनी चालाकी से बुना गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष अदालत में अपना छठवां परिवाद (चार्जशीट) पेश कर दिया है। इस बार ED के रडार पर सिंडिकेट के वो 'प्यादे' हैं, जिन्हें 'मोहरा' बनाकर मास्टरमाइंड्स ने करोड़ों रुपये डकारे और खुद पर्दे के पीछे छिपे रहे।
भिलाई के दो नए चेहरों— टी. भुनेश्वर राव और प्रोबीर शर्मा को बिना गिरफ्तारी के आरोपी बनाया गया है। नया परिवाद इस बात का कच्चा चिट्ठा है कि कैसे चंद हजार की सैलरी पाने वाले एकाउंटेंट को रातों-रात शराब कंपनियों का 'डमी डायरेक्टर' बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की पाइपलाइन बिछाई गई।
द डमी डायरेक्टर पार्ट-1: एकाउंटेंट की कुर्सी से 26 करोड़ का खेल
शराब सिंडिकेट ने भिलाई के कारोबारी विजय भाटिया के 15 साल पुराने वफादार एकाउंटेंट टी. भुनेश्वर राव को बलि का बकरा बनाया। उसे 'ओम साईं ब्रेवरेज' का डमी डायरेक्टर घोषित कर दिया गया, जबकि कंपनी का पूरा रिमोट कंट्रोल विजय भाटिया के ही हाथों में था।
सैलरी का 'रिवर्स गियर: जांच भटकाने के लिए कागजों में भुनेश्वर की सैलरी 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये महीना की गई। 4 साल में 97.12 लाख रुपये वेतन के तौर पर निकाले गए, लेकिन यह पूरी रकम वापस भाटिया की जेब में ही चली जाती थी।
भाटिया वाइन्स के मालिक सुरजीत सिंह भाटिया की चार फर्मों से 1 करोड़ रुपये भुनेश्वर के खाते में ट्रांसफर किए गए, जो घूम-फिर कर विजय भाटिया तक पहुंच गए।
ED की जांच में सामने आया है कि इस डमी डायरेक्टर के जरिए करीब 26 करोड़ रुपये की सीधी हेराफेरी की गई। कागजों में शेयर अतुल सिंह (24%), मुकेश मनचंदा (24%), भुनेश्वर (26%) और रवि (26%) के नाम थे, लेकिन मुनाफा सीधा 'आकाओं' की तिजोरी में जा रहा था।
चार्जशीट का दूसरा मोहरा भिलाई का प्रोबीर शर्मा है, जो पप्पू बंसल और अनवर के इशारों पर काम करता था। विदेशी शराब (FL-10) में कमीशनखोरी का नेक्सस चलाने के लिए अनवर ने ब्रेवेस्की ब्रेवेरेज नाम की फर्म खड़ी की और प्रोबीर को इसका डायरेक्टर बना दिया।
20-25% का मोटा कमीशन
FL-10A लाइसेंस वाली कंपनियों से मनमाना 20 से 25 प्रतिशत का मार्जिन वसूला गया। तीन कंपनियों की बिलिंग के जरिए लगभग 40 करोड़ रुपये का काला धन अर्जित किया गया।
इस लूट में से 4 करोड़ रुपये प्रोबीर ने अपने पिता के खाते में डाल दिए। बाकी बची करोड़ों की रकम मानव सक्सेना, उसकी पत्नी, मधु सिंह और शशि भूषण जैसे सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
मुंबई-बेंगलुरु तक बिछा है काले धन का जाल
NJV के सूत्रों और ED के परिवाद से साफ है कि यह सिर्फ शराब बेचने का घोटाला नहीं था, बल्कि यह एक हाई-टेक मनी लॉन्ड्रिंग नेक्सस था। भिलाई के सफेदपोश कारोबारियों के निर्देश पर जनता की गाढ़ी कमाई का यह पैसा मुंबई और बेंगलुरु के रियल एस्टेट व अन्य प्रोजेक्ट्स में खपाया गया। ED का यह छठवां परिवाद साबित करता है कि फ्रंटलाइन पर सिर्फ डमी काम कर रहे थे, और पूरा खेल बैकडोर से चल रहा था।
