स्वागत विहार के लोग जमीन नामांतरण के लिए 2 साल से कर रहे इंतजार , अब अफसरशाही के खिलाफ सड़क पर उतर कर करेंगे आर पार की लड़ाई

स्वागत विहार के लोग जमीन नामांतरण के लिए 2 साल से कर रहे इंतजार , अब अफसरशाही के खिलाफ सड़क पर उतर कर करेंगे आर पार की लड़ाई

 रायपुर। रायपुर के स्वागत विहार में जमीन खरीदकर फंसे करीब 2910 लोग अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। रविवार को कलेक्टोरेट गार्डन में होली मिलन के बहाने जुटे इन पीड़ितों ने प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले दो साल से नामांतरण के लिए भटक रहे इन लोगों ने अब दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सीधे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का बड़ा फैसला लिया है। अफसरों की लापरवाही और फाइलों की सुस्ती से नाराज नागरिकों ने साफ कह दिया है कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है।

अफसरों की फाइलों में आम आदमी के सपनों की होली जल रही है। सिस्टम की सुस्ती का आलम यह है कि नामांतरण की प्रक्रिया नगर निगम और एसडीएम दफ्तर के बीच फुटबॉल बनी हुई है। स्वागत विहार भू एवं भवन स्वामी विकास संघ के बैनर तले जुटे लोगों ने अफसरों को जमकर कोसा और कहा कि उनकी गलती की सजा निर्दोष खरीदार भुगत रहे हैं। कार्यक्रम में रायपुर के अलावा दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ से भी लोग पहुंचे थे जिन्होंने एक दूसरे को गुलाल लगाकर अपनी जमीन वापस पाने का संकल्प लिया।

संघ के सचिव गगन सोनी ने बताया कि पीड़ित लोग पिछले 17 साल से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोग कभी कोर्ट के चक्कर काटते हैं तो कभी मंत्रियों की चौखट पर माथा टेकते हैं लेकिन आज तक राहत की एक बूंद नहीं मिली। बिल्डर और भ्रष्ट अफसरों ने मिलकर जो भ्रष्टाचार का खेल खेला उसका खामियाजा आज वह मध्यमवर्गीय परिवार भुगत रहा है जिसने पाई पाई जोड़कर जमीन खरीदी थी। गगन सोनी ने आरोप लगाया कि मंत्री और अधिकारी केवल खोखले आश्वासन देते हैं जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है।

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इस पूरे मामले में मानवीय दर्द भी कम नहीं है। कई बुजुर्ग तो अपनी जमीन का मालिकाना हक देखे बिना ही इस दुनिया से चले गए। कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने जीवनभर की पूरी जमा पूंजी इस उम्मीद में लगा दी थी कि उनका अपना एक घर होगा। आलम यह है कि लोग आज भी बैंकों से लिए गए लोन की ईएमआई भर रहे हैं लेकिन अपनी ही जमीन पर उनका कोई हक नहीं है। सरकारी सिस्टम की इस बेरुखी ने लोगों को अब उग्र होने पर मजबूर कर दिया है। सरकार की तरफ से भी अब तक कोई कड़ा फैसला नहीं आने से नागरिकों में भारी आक्रोश है।

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