खाकी का हैंगओवर: वीआईपी थाने में सजी मयखाने की महफिल, 10 बोतलों के बीच लुढ़के आरक्षक को बचाने पुलिस ने लिखी फ्लॉप स्क्रिप्ट

खाकी का हैंगओवर: वीआईपी थाने में सजी मयखाने की महफिल, 10 बोतलों के बीच लुढ़के आरक्षक को बचाने पुलिस ने लिखी फ्लॉप स्क्रिप्ट

बिलासपुर। खाकी वर्दी, थाने का अभेद और सेफ कैंपस और आस-पास सजी बीयर-शराब की दर्जन भर बोतलें... यह नजारा शहर के किसी अवैध अहाते का नहीं, बल्कि न्यायधानी के वीआईपी माने जाने वाले सिविल लाइन थाने का है। सोशल मीडिया पर वायरल आरक्षक मनोज साहू के वीडियो ने पुलिस महकमे के अनुशासन की धज्जियां उड़ा दी हैं। लेकिन इस पूरे एपिसोड में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात आरक्षक का नशे में होना नहीं है, बल्कि पुलिस द्वारा अपने इस नशेड़ी जवान को बचाने के लिए गढ़ी जा रही वह फ्लॉप स्क्रिप्ट है, जिसमें तर्क कम और लीपापोती ज्यादा नजर आ रही है।

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थकान का खुमार या कुछ और....

 

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वायरल वीडियो में वर्दी और जूते ताने सिपाही मनोज साहू बेसुध लेटा है । आधा शरीर गद्दे पर और आधा जमीन पर। अब विभाग के बचाव का तर्क सुनिए जवान ड्यूटी से थककर सो रहा था, किसी ने पास में शराब की बोतलें रखकर वीडियो बना लिया।

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     अब सवाल यह है कि क्या कोई षड़यंत्र कारी व्यक्ति थाना परिसर के अंदर अपने साथ 10-10 शराब और बीयर की खाली और भरी बोतल लेकर घूम रहा था, और सिपाही के थककर सोने का इंतजार कर रहा था ताकि बोतल सजाकर वीडियो बना ले ? एक सजग व्यक्ति बिस्तर पर कैसे सोता है और नशे में धुत इंसान जमीन पर कैसे लुढ़कता है, इसका अंतर समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है।

पुराना वीडियो बताकर असली मुद्दे से भटकौव्व्ल का खेल....

 

पुलिस का कहती है कि वीडियो थाने के उस पुराने भवन का है जो महीनों पहले भसक चुका है और इसे नया बताकर ब्लैकमेल किया जा रहा था। यह तर्क अपने आप में हंसी आती है। जो भवन महीनों पहले जर्जर हो कर मिट्टी में मिल चुका हो, उसका वीडियो नया बताकर कोई अफसर को कैसे बेवकूफ बना सकता है?

मुद्दा वीडियो के नए या पुराने होने का है ही नहीं। क्या वीडियो पुराना होने से थाने के अंदर रखी शराब की बोतलें फूल के गुलदस्तों में बदल जाएंगी? वीआईपी थाने के भीतर वर्दी में शराबखोरी का अपराध तब भी उतना ही संगीन था, जितना आज है।

आदतन है यह 'वर्दी वाला बाबू'

आरक्षक मनोज साहू के लिए यह कोई पहला मामला नहीं है। महकमे के सूत्र बताते हैं कि इनका विवादों और नशे से पुराना नाता है:

  एक दुकानदार से मारपीट के मामले में यह आरक्षक पहले भी 'लाइन अटैच' की सजा भुगत चुका है। कुछ महीने पहले नाइट पेट्रोलिंग के दौरान यह तत्कालीन टीआई का फोन इग्नोर कर ड्यूटी से गायब हो गया था। सुबह 4 बजे जब लौटा, तो पता चला कि ड्राइवर के साथ मंगल धुरीपारा में नदी किनारे भारी शराब पीकर पड़ा हुआ था। उस वक्त भी पेट्रोलिंग टीम के ही एक जवान ने इसका वीडियो बनाया था।

कुछ सवाल ? जो क्लिक करते हैं...

सुरक्षा के कड़े पहरे वाले वीआईपी थाने के अंदर 10 बोतलें बिना किसी की शह के कैसे पहुंचीं?इस महफिल में आरक्षक के साथ और कौन-कौन पियक्कड़ शामिल थे.क्या आला अधिकारियों को थाने में चल रहे इस मयखाने की भनक तक नहीं थी, याजानकर आंखें मूंद ली गईं?

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