- Hindi News
- शराब खरीदी कंपनी में एमडी वही होगा, जो ढेबर को अच्छा लगेगा,…….
शराब खरीदी कंपनी में एमडी वही होगा, जो ढेबर को अच्छा लगेगा,…….
शराब खरीदी कंपनी में एमडी वही होगा, जो ढेबर को अच्छा लगेगा,……. रायपुर : भाजपा का शासन शुरू हो चुका है, लेकिन शराब, कोयला, रेत, खनिज सभी में ऐसे लोग अपनी जुगत भिड़ा रहे हैं, जो कांग्रेस के समय भी सक्रिय रहे। ऐसे ही एक अफसर को भाजपा शासनकाल में शराब कंपनी का एमडी बना […]
शराब खरीदी कंपनी में एमडी वही होगा, जो ढेबर को अच्छा लगेगा,…….

रायपुर : भाजपा का शासन शुरू हो चुका है, लेकिन शराब, कोयला, रेत, खनिज सभी में ऐसे लोग अपनी जुगत भिड़ा रहे हैं, जो कांग्रेस के समय भी सक्रिय रहे। ऐसे ही एक अफसर को भाजपा शासनकाल में शराब कंपनी का एमडी बना दिया गया है, जो ढेबर के करीबी थे। उन्हें रायपुर नगर निगम में बाकायदा अपर आयुक्त बनाकर लाया गया था।
शराब लॉबी में नाम बदलने का खेल चल रहा है, चेहरे वही पुराने होंगे। इसी कड़ी में चहेते अधिकारियों को मनमानी पोस्टिंग करवाई जा रही है। इसके लिए बाकायदा यह भी कहा जा रहा है कि जितना पैसा लगे, कंपनी देगी, अफसर उनके मुताबिक होना चाहिए। और वही पुराने चेहरे अपने हिसाब से पोस्टिंग कराने में लगे हुए हैं। और कई लोग पुराने जगहों पर ही जमे हुए हैं। दो महिने से अधिक हो गया सरकार को आये हुए पर दागी अफसरों को अभी तक नहीं हटाया गया है। जबकि इन सभी के खिलाफ ईओ डब्ल्यू व एसीबी में ईडी ने अपराध दर्ज कराया है और अपराध दर्ज हो गया है।
छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले का पर्दे के पीछे का असली सूत्राधार आखिर कौन था?
जिसने मंत्री से लेकर पूरे आबकारी महकमे को सलाखों के पीछे भेजने का काम कर दिया है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 B, आपराधिक षड्यंत्र 420, बेईमानी 467, जाली दस्तावेज बनाना 471, धोखाधडी के तहत ईडी ने छत्तीसगढ़ के अरबों के शराब घोटाले के लिए 71 लोगो को जिम्मेदार माना है और ईओडबल्यू विभाग में अपराध दर्ज करा दिया है। यदि आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य के आधार पर आरोप प्रमाणित हो जाता है तो न्यूनतम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
इन 71लोगो में कांग्रेस सरकार के आबकारी मंत्री कवासी लखमा, एक भूतपूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, दो आइएएस अनिल टुटेजा, निरंजनदास(पूर्व आयुक्त आबकारी) एक आईईइस अमरपति त्रिपाठी का नाम है।इनके अलावा आबकारी विभाग के एक अतिरिक्त आयुक्त आशीष श्रीवास्तव, 3 उपायुक्त अभिषेक नेताम, विजय सेन शर्मा, नीतू नोतानी, का नाम भी इस मामले में है। 9 सहायक आयुक्त अरविंद पटले, प्रमोद नेताम, रामकृष्ण मिश्र, सौरभ बक्शी, दिनकर वासनिक, रवीश तिवारी, नवीन प्रताप तोमर, श्रीमती सोनल नेताम, मंजू श्री कसेर,का नाम दर्ज है। 5 जिला आबकारी अधिकारी इकबाल खान, मोहित जायसवाल, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंग ठाकुर, और अशोक कुमार सिंह भी शुमार है।
2 सहायक आबकारी अधिकारी नितिन खनूजा और जनार्दन कौरव, के सहित अन्य आबकारी अधिकारीगण की शिनाख्ती का जिम्मा ईओडबल्यू को ईडी के अधिकारी ने एफआईआर दर्ज करा कर दे दिया है। इन सभी पर अपने पद के दुरुपयोग कर शराब के डिस्टलरी से निकल कर बिक्री तक की प्रक्रिया में अवैध रूप से नकली होलोग्राम के जरिए शराब बिकवा कर समांतर पैसे उगाहने, कमाने और रिश्वत के रूप में ऊपर पहुंचाने का आरोप है। आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग प्रमुख रूप से सरकारी पद का दुरुपयोग कर अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने वालो के खिलाफ जांच करना है।
ईडी के अधिकारी ने आबकारी विभाग के मंत्री, आयुक्त, उपयुक्त, सहायक आयुक्त,जिला आबकारी अधिकारी सहित सहायक आबकारी अधिकारी सहित अन्य आबकारी अधिकारीगण को शराब के अवैध व्यापार कर शासन को नुकसान पहुंचा कर नियम विपरीत धन अर्जन का आरोप को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए है।
आखिर कौन वो व्यक्ति था जिसके झांसे में राज्य का पूरा आबकारी महकमा आ गया ? ये बात हर किसी के जेहन में है।
दो दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में शराब की बिक्री के माध्यम से राजस्व को अपने पहले के मुख्य मंत्री के कार्यकाल से दुगुना तिगुना होने की बात कहे थे। कहा जाता है कि गलती को छुपाने के लिए कहानी कहना जरुरी होता है। प्रदेश में एक नंबर के शराब बिक्री के साथ समांतर शराब बिक्री के लिए रायपुर के एक परिवार के कंपनी सहित सदस्यो ने ये बीड़ा उठाया था कि शराब की अवैध कमाई के लिए कौन कौन जिम्मेदारी लेंगे। इसके लिए विभाग में एक प्रमोटी आईएएस निरंजन दास को नियुक्त किया गया। उस गैंग में आईईएस अधिकारी अमरपति त्रिपाठी जो भारतीय संचार सेवा लिमिटेड से प्रतिनियुक्ति में आए थे,उन्हे शामिल किया गया। ये शख्स हर जगह जाकर जुगाड़ बनाता चला गया।

भाजपा ने इस खेल को शुरू में ही नहीं रोका, तो आने वाले समय में जो धारणा कांग्रेस के लिए पांच साल में बन गई, वह धारणा दो साल में ही भाजपा के लिए बन जाएगी।
जिन्हें अभी यहां लाया गया है, वो भाजपा में वित्त विभाग से संबंधित एक पद सुशोभित व्यक्ति के भतीजे भी हैं। सुनने में यह भी आ रहा है कि संघ का नाम लेकर इन्होंने शराब में वसूली भी शुरू कर दी है। यह संकेत खतरनाक है। आबकारी विभाग को कांग्रेस शासन में एक दागी विभाग का तमगा मिल चुका है। इस दाग में कहीं भाजपा चार चांद न लगा दे ।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
