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ईरान युद्ध में अमेरिका बैकफुट पर? 10 दिन बाद ही सुलह की बात, ट्रंप के सलाहकारों ने जताई चिंता
नई दिल्ली. ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। हमले शुरू होने के करीब 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके सलाहकारों ने युद्ध खत्म करने और सुलह का रास्ता तलाशने की सलाह दी है। सलाहकारों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य नुकसान अमेरिका को उठाना पड़ सकता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के करीबी सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ संघर्ष से फिलहाल अमेरिका को कोई स्पष्ट रणनीतिक या आर्थिक लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। इसके अलावा लंबा युद्ध रिपब्लिकन समर्थकों को भी नाराज कर सकता है, जो आने वाले मिडटर्म चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार (10 मार्च) को संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही इस युद्ध को खत्म करने का रास्ता तलाश सकता है।
तख्तापलट का लक्ष्य अधूरा
युद्ध की शुरुआत में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन बताया जा रहा था। शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को मार गिराया गया। इसके बावजूद ईरान ने संघर्ष जारी रखा और हालात अमेरिका की उम्मीद के मुताबिक नहीं बदले।
अमेरिका के बैकफुट पर आने की तीन बड़ी वजहें
1. खुफिया रिपोर्ट ने जताई शंका
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हमलों से ईरान में तख्तापलट संभव नहीं दिख रहा। शीर्ष नेताओं की मौत के बावजूद ईरान में व्यापक जनविद्रोह नहीं हुआ।
2. अमेरिकी जनता का विरोध
Quinnipiac University के सर्वे के मुताबिक 53 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ईरान पर सैन्य हमले के खिलाफ हैं। वहीं 44 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका इजराइल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा था कि ईरान पर हमला करने के पीछे इजराइल का दबाव एक बड़ा कारण था।
3. युद्ध का बढ़ता खर्च
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के पहले दो दिनों में ही अमेरिका ने लगभग 5.6 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद खर्च कर दिया। वहीं अनादोलु एजेंसी का दावा है कि 10 दिनों के भीतर अमेरिका इस युद्ध पर 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है।
ईरान का पलटवार और बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका को उम्मीद थी कि युद्ध शुरू होते ही ईरान में सत्ता परिवर्तन हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका “प्लान-बी” के जरिए युद्ध जीतने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसमें भी उसे सफलता नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जल्द कूटनीतिक बातचीत शुरू होती है तो युद्धविराम की संभावना बन सकती है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार है और स्थिति तेजी से बदल सकती है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
