छत्तीसगढ़ में महंगी हो सकती है बिजली: 6300 करोड़ के घाटे के बाद टैरिफ बढ़ाने पर विचार

छत्तीसगढ़ में महंगी हो सकती है बिजली: 6300 करोड़ के घाटे के बाद टैरिफ बढ़ाने पर विचार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राज्य की बिजली कंपनी ने भारी वित्तीय घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। इस मुद्दे पर फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में विचार-विमर्श जारी है और अंतिम निर्णय जनसुनवाई व वित्तीय आकलन के बाद लिया जाएगा।

बिजली कंपनी ने बताया बड़ा घाटा
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने नए वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नियामक आयोग के सामने अपनी वित्तीय स्थिति का ब्यौरा प्रस्तुत किया है। कंपनी के मुताबिक पिछले वर्षों के अंतर और वित्तीय समायोजन को जोड़ते हुए लगभग 6300 करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया गया है।हालांकि चालू दरों के आधार पर कंपनी को लगभग 26,216 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है, जबकि कुल अनुमानित खर्च करीब 25,460 करोड़ रुपये बताया गया है। इस हिसाब से मौजूदा वर्ष में मामूली लाभ संभव है, लेकिन पुराने घाटे को जोड़ने पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।

20% तक बढ़ सकता है बिजली टैरिफ
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि नियामक आयोग कंपनी के दावे को स्वीकार करता है और घाटे का बड़ा हिस्सा मान्य कर लिया जाता है, तो बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की नौबत आ सकती है। तुलना करें तो पिछले वर्ष करीब 500 करोड़ रुपये के घाटे को आधार मानते हुए बिजली दरों में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी।

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सब्सिडी से मिल सकती है राहत
यदि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को राहत देना चाहती है तो उसे बिजली कंपनी को सब्सिडी प्रदान करनी पड़ सकती है। इससे टैरिफ वृद्धि का असर कम किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि दो वर्ष पहले भी राज्य सरकार ने लगभग 1000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर बिजली दरों को नियंत्रित रखने की कोशिश की थी।

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किस्तों में वसूली का भी विकल्प
सूत्रों के मुताबिक एक विकल्प यह भी है कि बिजली कंपनी के घाटे को एकमुश्त वसूलने की बजाय तीन वर्षों में किस्तों के रूप में समायोजित किया जाए। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ऐसा करने से केंद्र सरकार की आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, बिजली नियामक आयोग सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है। जनसुनवाई और वित्तीय समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।

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