निजी मोबाइल पर वीएसके ऐप की अनिवार्यता पर हाई कोर्ट की रोक सरकार से दो हफ्ते में जवाब तलब
बिलासपुरl छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए वीएसके ऐप की अनिवार्यता के मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एन के चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई होने तक संबंधित शिक्षक को अपने निजी मोबाइल पर ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से निजता के अधिकार का हवाला दिया गया। शिक्षक ने तर्क रखा कि शासन अपने काम के लिए कर्मचारियों के निजी संसाधनों का जबरन इस्तेमाल नहीं कर सकता। किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को पर्सनल मोबाइल में अनिवार्य रूप से डलवाना निजता का हनन है। कोर्ट ने इन दलीलों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। सरकार को अब दो सप्ताह के भीतर इस पर विस्तृत जवाब पेश करना होगा।
शिक्षा विभाग स्कूलों की निगरानी और हाजिरी के लिए वीएसके ऐप का इस्तेमाल कर रहा है। इसे लेकर शिक्षकों में पहले से ही विरोध था। शिक्षकों का कहना था कि निजी फोन पर सरकारी ऐप रखने से डेटा चोरी और निगरानी का खतरा बना रहता है। विधि विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल यह राहत केवल याचिकाकर्ता शिक्षक को मिली है लेकिन सरकार के जवाब के बाद इस पर बड़ा फैसला आ सकता है जो सभी शिक्षकों पर लागू होगा।
