छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला बिना पेनिट्रेशन रेप नहीं केवल दुष्कर्म की कोशिश आरोपी की सजा आधी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला बिना पेनिट्रेशन रेप नहीं केवल दुष्कर्म की कोशिश आरोपी की सजा आधी

बिलासपुर l हाई कोर्ट ने रेप के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर किसी महिला के साथ पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं होता है और केवल प्राइवेट पार्ट को रगड़ा गया है तो इसे कानून की नजर में दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। जस्टिस एनके व्यास ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस तरह का कृत्य दुष्कर्म की कोशिश की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने चिकित्सा और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की सजा को सात साल से घटाकर साढ़े तीन साल कर दिया है। यह मामला धमतरी जिले का है जहां निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया था।

घटना 21 मई 2004 की है जब पीड़िता अपने घर में अकेली थी। अभियोजन के मुताबिक आरोपी उसे जबरदस्ती खींचकर अपने घर ले गया था। वहां उसने पीड़िता और अपने कपड़े उतारे और उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। आरोपी ने पीड़िता को कमरे में बंद करके उसके हाथ पैर बांध दिए थे और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। बाद में पीड़िता की मां मौके पर पहुंची और उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाया। इसके बाद अर्जुनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। निचली अदालत ने 6 अप्रैल 2005 को आरोपी को रेप और गलत तरीके से बंधक बनाने का दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील राहिल अरुण कोचर और लीकेश कुमार ने तर्क दिया कि मेडिकल रिपोर्ट में जबरन यौन संबंध की पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि पीड़िता का हाइमन सुरक्षित पाया गया था। वहीं शासन की ओर से पैनल लॉयर मनीष कश्यप ने कहा कि कपड़ों पर मानव शुक्राणु मिले थे और प्राइवेट पार्ट में लालिमा पाई गई थी जो जबरदस्ती की ओर इशारा करती है। गवाही के दौरान डॉ आशा त्रिपाठी ने बताया कि हाइमन नहीं फटा था और योनि में केवल अंगली का पोर ही प्रवेश कर सकता था जिससे पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं होता।

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जस्टिस एनके व्यास ने कहा कि पीड़िता के बयानों में भी विरोधाभास है। पीड़िता ने बाद में कहा कि आरोपी ने अपना प्राइवेट पार्ट उसके प्राइवेट पार्ट के ऊपर करीब 10 मिनट तक रखा लेकिन अंदर प्रवेश नहीं किया। कोर्ट ने माना कि आरोपी का पीड़िता को जबरन ले जाना कपड़े उतारना और जननांग रगड़ना गंभीर अपराध है और उसकी नीयत खराब थी। हालांकि पेनिट्रेशन साबित न होने पर कोर्ट ने इसे रेप की जगह रेप के प्रयास का मामला माना और सजा कम कर दी।

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