कोल स्कैम में टाइप्ड बयान विवाद पर अमरेश मिश्रा समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायत याचिका खारिज

कोल स्कैम में टाइप्ड बयान विवाद पर अमरेश मिश्रा समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायत याचिका खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुर्खियां बटोरने वाले कोल स्कैम  से जुड़े कथित टाइप्ड बयान विवाद में रायपुर न्यायालय ने ACB-EOW के मुख्य अमरेश मिश्रा समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायत प्रारंभिक स्तर पर खारिज कर दी है। अदालत ने अपने निर्णय में साफ कहा कि यह निर्णय आरोपों की सत्यता पर नहीं, बल्कि अधिकार क्षेत्र के अभाव के आधार पर लिया गया है। चीफ न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ipc की धारा 164 के तहत दर्ज बयान या उससे जुड़े दस्तावेज जिस अदालत में प्रस्तुत किए गए हों, सुनवाई का अधिकार उसी अदालत को होता है। वर्तमान शिकायत उस दायरे में नहीं आती, इसलिए इसे विचार योग्य नहीं माना जा सकता।इस मामले में ACB-EOW के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन का आरोप लगाया था कि कोल घोटाला (केस नंबर 02/2024 और 03/2024) की जांच के दौरान सह-आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष विधिवत दर्ज कराने के बजाय पहले से टाइप किया हुआ दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किया गया।

यह पूरा विवाद उस समय प्रकाश में आया था जब आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत सुनवाई के दौरान EOW/ACB द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रतियां बचाव पक्ष को दी गईं। शिकायत के अनुसार, बयान की भाषा, फॉर्मेट और फॉन्ट अदालतों में प्रचलित प्रारूप से मेल नहीं खाते थे। आरोप लगाया गया कि दस्तावेज अदालत परिसर के बाहर तैयार कर पेनड्राइव के माध्यम से पेश किया गया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता रवि शर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि संबंधित अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे और उन्हें विधिक संरक्षण प्राप्त है। साथ ही, यह भी कहा गया कि शिकायत इस अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फैज़ल रिजवी ने दलील दी कि यदि दस्तावेजों में कूटरचना हुई है तो यह एक स्वतंत्र आपराधिक कृत्य है, जिसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने आदेश के खिलाफ रिविजन याचिका दायर करने की बात कही है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें कथित विसंगतियों की पुष्टि हुई। हालांकि, अदालत ने इन दावों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल प्रक्रिया संबंधी आधार पर शिकायत निरस्त की।

 

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