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फर्जी चैट के फेर में महिला डीएसपी सस्पेंड, विशाखा कमेटी से दोषी आईपीएस पर सिस्टम खामोश
रायपुर। गृह विभाग ने गुरुवार को एक तरफा फैसला लेते हुए महिला डीएसपी कल्पना वर्मा को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। विभाग ने यह कार्रवाई एक हिस्ट्रीशीटर के साथ वायरल हुई कथित व्हाट्सएप चैट के आधार पर की है। मगर इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे और सिस्टम के दोहरे चरित्र की पोल खोलकर रख दी है। सवाल उठ रहे हैं कि जिस फुर्ती से एक महिला अधिकारी को बिना फॉरेंसिक जांच के नाप दिया गया वैसी तेजी रसूखदार आईपीएस अफसरों के मामले में क्यों नहीं दिखाई गई। हालात यह हैं कि विशाखा कमेटी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी आईपीएस पवन देव मलाईदार पदों पर जमे हैं और सिस्टम उन पर मेहरबान है।
सूत्रों के मुताबिक डीएसपी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत मानी जा रही चैट दरअसल एक सोची समझी डिजिटल साजिश का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड दीपक टंडन ने अपनी दूसरी पत्नी बरखा से खुद ही यह चैट टाइप करवाई थी। उसने डीएसपी के नाम से नंबर सेव करके फर्जी बातचीत का स्क्रीनशॉट तैयार किया ताकि अधिकारी को फंसाया जा सके। विभाग ने यहां भारी चूक कर दी है। पुलिस ने न तो दीपक का मोबाइल जब्त किया और न ही उसकी पत्नी बरखा का। बिना मोबाइल जब्त किए और बिना यह जांचे कि चैट असल में किस डिवाइस से भेजी गई सीधे कार्रवाई का डंडा चला दिया गया।
जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह भेदभावपूर्ण और टारगेटेड है। आईपीएस पवन देव पर मुंगेली की महिला आरक्षक ने प्रताड़ना के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। नियम के मुताबिक बनी विशाखा कमेटी ने जांच में इन आरोपों को सही भी पाया था। इसके बावजूद रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और अफसर पर कोई आंच नहीं आई। इसी तरह योगा वाले आईपीएस रतन लाल डांगी की तस्वीरें वायरल होने पर भी जांच के नाम पर केवल लीपापोती हुई और फाइलें एक टेबल से दूसरे टेबल घूमती रहीं।
सिस्टम का मजाक देखिए कि जिस दीपक टंडन के साथ मिलीभगत का आरोप लगाकर डीएसपी को सस्पेंड किया गया है वह मुख्य आरोपी अब भी आजाद घूम रहा है। उसके खिलाफ पूरे प्रदेश में शिकायतें हैं और कोर्ट से वारंट भी जारी है। पुलिस असली अपराधी को तो पकड़ नहीं पाई लेकिन अपनी ही विभाग की महिला अधिकारी पर कार्रवाई करके खानापूर्ति कर ली है। यह मामला साफ बता रहा है कि नियम कायदे केवल छोटे कर्मचारियों के लिए हैं जबकि बड़े अफसरों का रसूख उन्हें हर दाग से बचा लेता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में प्रस्तुत किए गए तथ्य, दावे और विचार विभिन्न सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। हम वायरल हुई व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट या खबर में दावा की गई 'डिजिटल साजिश' की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (Independently Verify) नहीं करते हैं। खबर में जिन भी अधिकारियों (डीएसपी या आईपीएस) या व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, उन पर लगे आरोपों या निर्दोषिता का निर्णय विभागीय जांच और न्यायालय के अधीन है। यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष या संस्था की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सिस्टम के कामकाज पर उठ रहे सवालों और उपलब्ध जानकारी को पाठकों के समक्ष रखने हेतु प्रकाशित की गई है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
