राइस मिलर और पूर्व मंत्री के करीबियों के ठिकानों पर पूरी रात चली ED की कार्यवाही, 500 करोड़ का है पूरा 'खेला।
रायपुर ।छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की धमक से हड़कंप मच हुआ है। सूबे के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) में हुए करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले को लेकर ED ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। सोमवार को ईडी की टीमों ने धमतरी में कई रसूखदारों के ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। पूरी रात चली इस मैराथन जांच और कार्यवाही के बाद मंगलवार सुबह टीम कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त कर लौटी है। इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भारी खलबली है।
रडार पर पूर्व मंत्री के करीबी और राइस मिलर
ED की इस ताजा कार्यवाही के केंद्र में धमतरी के दो बड़े नाम शामिल हैं - राइस मिलर रोशन चंद्राकर और भाजपा से जुड़े नेता भूपेंद्र चंद्राकर। भूपेंद्र चंद्राकर को सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कद्दावर नेता अजय चंद्राकर का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ईडी की टीम ने इनके ठिकानों से जमीन की खरीदी-बिक्री, बैंक ट्रांजैक्शन, और कई बेनामी संपत्तियों के कच्चे-पक्के कागजात बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों की पड़ताल से कई 'सफेदपोशों' के काले कारनामे उजागर हो सकते हैं।
क्या है 500 करोड़ का भारतमाला मुआवजा घोटाला?
रायपुर से विशाखापत्तनम तक बनने वाले इकोनॉमिक कॉरिडोर (Economic Corridor) के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इसी अधिग्रहण की आड़ में करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का 'खेला' कर दिया गया। ED और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि इस नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटा गया है।
कैसे रचा गया भ्रष्टाचार का यह चक्रव्यूह?
इस महाघोटाले को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों (एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी) और जमीन दलालों के सिंडिकेट ने मिलकर यह पूरा जाल बुना -
बैकडेट में डायवर्सन
कौड़ियों के भाव की कृषि भूमि को बैकडेट (पुरानी तारीख) में गैर-कृषि या व्यावसायिक भूमि में बदल दिया गया, ताकि सरकारी खजाने से कई गुना ज्यादा मुआवजा वसूला जा सके।
कागजों पर बंटवारा:
एक ही खसरे की बड़ी जमीन को कागजों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग डमी (फर्जी) लाभार्थियों के नाम पर चढ़ा दिया गया। मुआवजा राशि खातों में आते ही सिस्टम में बैठे अधिकारियों से लेकर बिचौलियों तक का तय कमीशन बंट गया। यह पूरा खेल एक संगठित गिरोह की तरह संचालित हो रहा था।
रोशन चंद्राकर का पुराना है विवादों से नाता
ईडी के रडार पर आए रोशन चंद्राकर का विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब तीन साल पहले प्रदेश के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग (चावल लेवी) घोटाले में भी ED ने उनके ठिकानों पर दबिश दी थी। उस मामले में उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। अब भारतमाला घोटाले में नाम आने से यह स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां पुराने और नए मामलों की कड़ियों को आपस में जोड़कर देख रही हैं।
सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
भारतमाला जैसी राष्ट्रीय महत्व की विकास परियोजना में इस स्तर की धांधली ने सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि विकास की गति को रोकने वाला कृत्य है।
अब किन पर गिरेगी गाज?
NJV सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ एक-दो रसूखदारों तक सीमित नहीं है। इसमें राजस्व विभाग के कई बड़े अफसरों और रसूखदार नेताओं की संलिप्तता की पूरी आशंका है। ED ने जो डिजिटल साक्ष्य (हार्ड डिस्क, मोबाइल, लैपटॉप) और डायरियां जब्त की हैं, उनकी डिकोडिंग शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इस 500 करोड़ के घोटाले में कुछ और बड़े चेहरों पर ईडी का शिकंजा कस सकता है और जल्द ही नई गिरफ्तारियां भी देखने को मिल सकती हैं।
