बेटे के कान का पर्दा फटा पर नहीं हुई एफआईआर, थाने के सामने धरने पर बैठे बेबस तहसीलदार पिता

बेटे के कान का पर्दा फटा पर नहीं हुई एफआईआर, थाने के सामने धरने पर बैठे बेबस तहसीलदार पिता

सारंगढ़। सुशासन वाली सरकार में कानून का हाल यह है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे तहसीलदार को भी अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ गया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत गुरुवार को सिटी कोतवाली थाने के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए। तहसीलदार का आरोप है कि कलेक्टर के गनमैन ने उनके बेटे राहुल के साथ बेरहमी से मारपीट की जिससे उसके कान का पर्दा फट गया। हैरानी की बात यह है कि घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस ने साहब के गनमैन के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जिससे नाराज होकर लाचार पिता को थाने की चौखट पर धरना देना पड़ रहा है।

साहब के गनमैन का खौफ या पुलिस की सुस्ती

पूरा मामला 20 जनवरी का है जब भारत माता चौक पर ट्रैफिक जाम के दौरान कलेक्टर के गनमैन हरिशचंद्र चंद्रा और तहसीलदार के बेटे राहुल के बीच विवाद हुआ था। पुलिस का दावा है कि राहुल ने गनमैन की वर्दी का कॉलर पकड़ा और बटन तोड़ दिए। वहीं तहसीलदार का कहना है कि गनमैन ने पद की धौंस दिखाते हुए उनके बेटे को इतना मारा कि उसे गंभीर चोट आई है। शहर में चर्चा है कि चूंकि आरोपी कलेक्टर का सुरक्षाकर्मी है इसलिए पुलिस एफआईआर लिखने के बजाय फाइल को एक टेबल से दूसरे टेबल पर घुमा रही है।

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8 बार फोन किया पर टीआई ने नहीं उठाया

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तहसीलदार बंदे राम भगत ने बताया कि वे दोपहर 3 बजे से थाने में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने थाना प्रभारी को 8 से 10 बार फोन किया लेकिन साहब ने कॉल रिसीव करने की जहमत नहीं उठाई। जब संपर्क हुआ भी तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। जांच अधिकारी ने कह दिया कि फाइल आरक्षक के पास है। पुलिस की इस टालमटोल से तंग आकर तहसीलदार ने साफ कह दिया है कि जब तक एफआईआर की कॉपी नहीं मिलेगी वे न तो अन्न ग्रहण करेंगे और न ही पानी पिएंगे।

मामले ने लिया सियासी रंग प्रशासन मौन 

एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह थाने के सामने बैठना जिले में चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है और सवाल पूछा है कि जब एक तहसीलदार सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी का क्या होगा। फिलहाल सिटी कोतवाली में हड़कंप मचा हुआ है और आला अधिकारी मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में जुटे हैं।

 

 

डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट मौके पर मौजूद परिस्थितियों, प्रार्थी के बयानों और पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। मारपीट और चोट के दावों की पुष्टि डॉक्टरी रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।

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