भूतहा' इंजीनियर ने पास कर दिया 90 फ्लैट का नक्शा! बिलासपुर में अनंत रियाल्टी का बड़ा 'खेला', 4 फ्लोर की मांगी थी परमिशन, अफसरों ने दे दी 6 की छूट

भूतहा' इंजीनियर ने पास कर दिया 90 फ्लैट का नक्शा! बिलासपुर में अनंत रियाल्टी का बड़ा 'खेला', 4 फ्लोर की मांगी थी परमिशन, अफसरों ने दे दी 6 की छूट

बिलासपुर. नियम-कानून सिर्फ आम आदमी के लिए होते हैं। अगर आप रसूखदार बिल्डर हैं, तो बिलासपुर का नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग आपके लिए हवा में भी दो फ्लोर पास कर सकता है। तालापारा इलाके में बन रहे 'मेसर्स अनंत रियाल्टी' के मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट में कुछ ऐसा ही हुआ है। इस प्रोजेक्ट में बिल्डर और अफसरों की ऐसी तगड़ी साठगांठ दिखी है कि एक ऐसे 'भूतहा' इंजीनियर से नक्शा पास करा लिया गया, जो शहर में मौजूद ही नहीं है। गजब का टैलेंट है! अब इस पूरे मामले की शिकायत सीधे नगरीय प्रशासन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश और कलेक्टर से की गई है।

इधर, विधानसभा में भी बिलासपुर के अवैध निर्माणों की गूंज सुनाई दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने शहर के 177 अवैध निर्माणों की जांच के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का ऐलान कर दिया है।

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4 फ्लोर का आवेदन, 6 फ्लोर का नक्शा पास

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बिल्डर अनंत रियाल्टी (पार्टनर नमन गोयल, सुजल गोयल और राजेश अग्रवाल) ने तालापारा (खसरा नंबर 15001) में प्रोजेक्ट के लिए T&CP से विकास अनुज्ञा मांगी थी। कागजों में बिल्डर ने 4 फ्लोर पर 60 फ्लैट बनाने की परमिशन का आवेदन दिया। लेकिन विभाग के मेहरबान अफसरों ने जो नक्शा पास किया, उसमें 6 फ्लोर और 90 फ्लैट दिखा दिए। मतलब 30 फ्लैट का सीधा-सीधा हवा-हवाई मुनाफा। शिकायतकर्ता गोपाल का आरोप है कि 25 जून 2025 को संयुक्त संचालक ने आंख मूंदकर इस कूट-रचित नक्शे पर साइन कर दिए।

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विकास' के नाम पर फर्जीवाड़ा, इंजीनियर ही गायब

इस पूरे घपले में सबसे मजेदार किरदार 'विकास सिंह' का है। कागजों में विकास सिंह वह अधिकृत इंजीनियर है जिसने इस प्रोजेक्ट का नक्शा बनाया। लेकिन असलियत यह है कि बिलासपुर में इस नाम का कोई आर्किटेक्ट है ही नहीं। यह एक फर्जी नाम है। नगर निगम पहले ही इस कथित इंजीनियर के लाइसेंस को सस्पेंड कर चुका है, क्योंकि इसके नाम पर पूर्व में भी कई अवैध नक्शे पास हो चुके हैं। फिर भी इसी सस्पेंड और फर्जी व्यक्ति के नाम से अनंत रियाल्टी का नक्शा धड़ल्ले से पास कर दिया गया।

मास्टर प्लान ताक पर: सड़क की जमीन पर तान दी बिल्डिंग

बिलासपुर मास्टर प्लान 2031 के अनुसार, जिस जमीन (खसरा नंबर 157/1, 157/26, 158/30) पर यह कॉम्प्लेक्स बन रहा है, वह आवासीय और 'सार्वजनिक मार्ग' (सड़क) के लिए आरक्षित है। लेकिन अफसरों ने बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए बिना भू-परिवर्तन किए सड़क की जमीन पर ही बिल्डिंग तानने की परमिशन दे दी।

यही नहीं, जमीन की पुरानी रजिस्ट्री में रास्ता 20 फीट का है, लेकिन परमिशन में इसे चमत्कारिक रूप से दोगुना करके 40 फीट (10 से 12 मीटर) दिखा दिया गया। सीमांकन के वक्त न तो आसपास के लोगों को नोटिस दिया गया और न ही मौके पर असली सीमांकन हुआ। पटवारी और राजस्व निरीक्षक ने ऑफिस में बैठकर ही बिल्डर के मनमुताबिक रिपोर्ट बना दी। बिल्डिंग नियम के तहत 10 प्रतिशत खुला हिस्सा (Open space) छोड़ना था, लेकिन मौके पर वह भी गायब है।

गरीबों के फ्लैट (EWS) के नाम पर झूठा शपथ पत्र

नए नियमों के मुताबिक, किसी भी कॉलोनाइजर को कमजोर आय वर्ग (EWS/LIG) के लिए 9% हिस्सा आरक्षित करना होता है। बिल्डर ने निगम को शपथ पत्र दिया कि वह EWS के फ्लैट ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 पर बनाएगा। जांच में पता चला कि यह जमीन बिल्डर के नाम पर दर्ज ही नहीं है! दूसरी तरफ, पास हुए नक्शे में लिखा है कि EWS के फ्लैट मुख्य साइट (तालापारा) पर ही बनेंगे। यानी गरीबों के हिस्से के मकानों को लेकर भी दस्तावेजों में सीधा-सीधा गोलमाल किया गया है।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा, अरुण साव ने दिए जांच के आदेश

बिलासपुर में बिल्डरों की इस मनमानी और भ्रष्टाचार का मुद्दा अब छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पहुंच गया है। शहर में चल रहे 177 अवैध निर्माणों और संस्थानों को लेकर हाल ही में प्रश्नकाल में जमकर चर्चा हुई। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया है कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में हो रहे इन सभी अवैध निर्माणों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी।

अब शिकायतकर्ता गोपाल ने प्रशासन से  मांग की है कि अनंत रियाल्टी का यह निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए। साथ ही धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप में बिल्डर नमन गोयल, सुजल गोयल, राजेश अग्रवाल, फर्जी इंजीनियर विकास सिंह और इसमें शामिल T&CP व निगम के दोषी अफसरों पर FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा 25.06.2025 को जारी विकास अनुज्ञा निरस्त कर प्रोजेक्ट को तोड़ा जाए। अब देखना है कि अरुण साव के जांच के आदेश के बाद निगम के बुलडोज़र इस 'हवा-हवाई' बिल्डिंग की तरफ कब मुड़ते हैं।

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