डीएसपी कल्पना वर्मा केस का सच: 21 केस वाले हिस्ट्रीशीटर को बचाने रची गई 1400 पन्नों की फर्जी कहानी, किस नेता के pa से नौकरी बचाने गिड़गिड़ा रहे थे जांच ! अधिकारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में इन दिनों गजब का खेल चल रहा है। 21 गंभीर मामलों के आरोपी हिस्ट्रीशीटर दीपक टंडन को 'संत' बनाने और एक महिला अफसर को फंसाने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली गई है। डीएसपी कल्पना वर्मा को जिस 1400 पेज की जांच रिपोर्ट के आधार पर सस्पेंड किया गया है, उसके तथ्य पूरी तरह से फर्जी बताए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी मोटी रिपोर्ट को बिना ठीक से पढ़े ही आनन-फानन में निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
कल्पना वर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और एक गहरी साजिश करार दिया है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा झोल उस अधिकारी का है, जिसने यह रिपोर्ट तैयार की है !
जांच अधिकारी की 'दागदार' कहानी
जांच अधिकारी एडिशनल एसपी खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि एक जांच अधिकारी ने 21 मुकदमों वाले एक हिस्ट्रीशीटर के पक्ष में इतनी मजबूत रिपोर्ट क्यों और किसके इशारे पर बना दी?
इसकी इनसाइड स्टोरी किसी थ्रिलर से कम नहीं है। खबर है कि बीते 15 मार्च को जांच अधिकारी को एक रसूखदार विधायक के पीए के सामने अपनी नौकरी बचाने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। उनके शब्द थे, "मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं।" एक एडिशनल एसपी रैंक के अफसर का यह हाल क्यों था, ये समझ से परे है बताया जा रहा है कि इसके तार उनके पुराने कारनामों से जुड़े हैं।
पुरानी फाइलें और 'ब्लैकमेल' का खेल
दरअसल, कीर्तन राठौर का दामन खुद साफ नहीं है। धमतरी में तैनाती के दौरान उन पर वीआईपी रोड स्थित 'करेंसी टावर' में करोड़ों का ऑफिस और दुकान खरीदने का आरोप है। इस मामले की शिकायत हुई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट आज भी आईजी कार्यालय में धूल खा रही है।पुलिस महकमे के गलियारों में चर्चा तेज है कि कहीं इसी पेंडिंग फाइल का डर दिखाकर राठौर पर दबाव तो नहीं बनाया गया? क्या खुद की नौकरी और रसूख बचाने के लिए उन्होंने एक महिला अफसर (डीएसपी कल्पना वर्मा) को बलि का बकरा बना दिया?
आरोपों की हवा-हवाई बातें!
अब बात करते हैं सरकार को सौंपी गई उस 1400 पन्नों की रिपोर्ट की। इसमें दावा किया गया है कि डीएसपी ने हिस्ट्रीशीटर कारोबारी से महंगे गिफ्ट लिए। इसे और सनसनीखेज बनाने के लिए माओवाद क्षेत्र की संवेदनशील खुफिया जानकारियां व्हाट्सएप पर लीक करने का आरोप भी मढ़ दिया गया। साथ ही 2.5 करोड़ की वसूली और भाई के नाम पर होटल खोलने के लिए पैसे ऐंठने की कहानी भी लिख दी गई।
जानकारों का कहना है कि व्हाट्सएप चैट को आधार बनाकर इतनी गंभीर बातें रिपोर्ट में सिर्फ इसलिए डाली गईं, ताकि केस मजबूत दिखे और निलंबन में कोई अड़चन न आए। एक आदतन अपराधी के बयानों को पुलिस विभाग ने वेद-वाक्य मान लिया।
सिस्टम से सवाल
एक हिस्ट्रीशीटर के कहने पर बिना तथ्यों की जांच किए एक अफसर का करियर दांव पर लगा दिया गया। अब पुलिस प्रशासन और सिस्टम से सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर डीएसपी कल्पना वर्मा पर बिना रिपोर्ट पढ़े इतनी तेजी से कार्रवाई हो सकती है, तो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे और नेताओं के सामने गिड़गिड़ाने वाले एडिशनल एसपी पर कार्रवाई कब होगी?उनके खिलाफ जांच का लिफाफा अब भी बंद पड़ा है । क्या नियम-कानून सिर्फ चुनिंदा लोगों को फंसाने के लिए ही बने हैं?
