बीजापुर हॉस्टल कांड: धर्मशाला बने सरकारी हॉस्टल, मंत्री जी बोले- बच्चियां वहां थीं ही नहीं; ग्राउंड जीरो पर खुली प्रशासन की पोल

बीजापुर हॉस्टल कांड: धर्मशाला बने सरकारी हॉस्टल, मंत्री जी बोले- बच्चियां वहां थीं ही नहीं; ग्राउंड जीरो पर खुली प्रशासन की पोल

रायपुर। बीजापुर के सरकारी हॉस्टल में तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने के मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह सिर्फ एक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के 'कोमा' में होने का जीता-जागता सबूत है। जगत पहल की पड़ताल और इस मामले का नया पहलू सामने आया है कि जिस हॉस्टल में ये सब हुआ, वो असल में हॉस्टल कम और 'धर्मशाला' ज्यादा था।

गौर करने वाली बात देखिए जिन तीन छात्राओं का जिक्र हो रहा है, उनमें से दो का तो वहां दाखिला ही नहीं था। वे सिर्फ अधीक्षिका की मौखिक निर्देश पर वहां रहती थी । उधर, विधानसभा में शिक्षा मंत्री सीना ठोक कर कह रहे हैं कि बच्चियां हॉस्टल में रहती ही नहीं थीं। मंत्री जी का बयान और जमीन की हकीकत एक-दूसरे को मुंह चिढ़ा रहे हैं।

बिना कागजों के चल रहा था 'अतिथि सत्कार'

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नियम-कानून बीजापुर के शिक्षा विभाग के लिए शायद कोई मायने नहीं रखते। जिस एक इकलौती छात्रा का आधिकारिक दाखिला था, वह भी सितंबर से गायब थी। हॉस्टल और स्कूल से पूरे 6 महीने तक एक नाबालिग नदारद रहती है और किसी मास्टर या वार्डन की नींद नहीं टूटती। बाकी दो बच्चियां 35 किलोमीटर दूर से आती थीं, तो पूर्व अधीक्षिका ने उन्हें बिना किसी एडमिशन के ही हॉस्टल में रख लिया। वो भी अपने विशेषाधिकार से 

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जनवरी में बन गए गर्भवती कार्ड, सब रहे खामोश

इस पूरे खेल में स्वास्थ्य विभाग का भी गजब का 'टैलेंट' सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जनवरी महीने से ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन नाबालिग बच्चियों की जांच हो रही थी। बाकायदा उनके गर्भवती कार्ड भी बन चुके थे। आधार कार्ड चीख-चीख कर बता रहा था कि तीनों नाबालिग हैं। फिर भी, न डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी और न ही महिला बाल विकास विभाग को इसकी भनक लगी। बाल विवाह रोकने और बच्चियों की सुरक्षा का दावा करने वाला सिस्टम शायद उस वक्त गहरी नींद में था।

अब शादी की तैयारी, सदन में गूंजा मुद्दा

पहल की टीम जब बच्चियों के गांव पहुंची तो पता चला कि छात्राएं अपने ससुराल में हैं। एक के मंगेतर ने साफ कहा कि दोनों में प्यार है और अब वे शादी करेंगे। सोमवार को विधानसभा के शून्यकाल में विपक्ष ने इस मुद्दे पर जमकर हंगामा किया और स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की। आसंदी ने इसे नामंजूर कर दिया और विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

2024 में भी हुआ था कांड, डीईओ साहब कर रहे नई गलती

यह कोई पहला मामला नहीं है। 2024 में भी इसी हॉस्टल की एक छात्रा गर्भवती हुई थी। सिस्टम ने तब भी लीपापोती की थी और अब भी वही रस्म निभाई जा रही है। कार्रवाई के नाम पर क्या हुआ? हॉस्टल अधीक्षिका को हटा दिया गया, लेकिन क्यों हटाया, अफसर यह बताने से कतरा रहे हैं। डीईओ लखनलाल धनेलिया ने प्राचार्य को एक नोटिस थमा दिया है। कमाल की बात तो यह है कि डीईओ साहब ने खुद नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने आधिकारिक बयान में छात्राओं की संस्था का नाम तक उजागर कर दिया।


प्रश्न है.........
  •   6 महीने से जो छात्रा हॉस्टल से गायब थी, उसकी हाजिरी रजिस्टर में कौन भर रहा था?
  •  बिना एडमिशन के 2 छात्राओं को हॉस्टल में रखने पर अधीक्षिका पर एफआईआर क्यों नहीं हुई?
  •  स्वास्थ्य केंद्र में नाबालिगों के गर्भवती होने का पता चलने पर तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई?

फिलहाल, सीडीपीओ की टीम गांव-गांव घूम रही है। कलेक्टर साहब को जांच रिपोर्ट मिलेगी। लेकिन देखना यह है कि क्या बड़े अफसरों पर कोई गाज गिरेगी या फिर हर बार की तरह कुछ दिन बाद इस फाइल पर भी धूल जम जाएगी।

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