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खाकी की मनमानी: रायपुर ग्रामीण में रसूखदारों का प्राइवेट लिमिटेड बना थाना, मासूम को मिली थर्ड डिग्री
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे ग्रामीण इलाकों में पुलिसिंग व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। एक तरफ जहां रायपुर शहर को कमिश्नरी प्रणाली के जरिए बेहतर बनाने के दावे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रायपुर ग्रामीण के थानों में रसूखदारों का सिक्का चल रहा है। विधानसभा थाना क्षेत्र का ताजा मामला इसका गवाह है, जहां एक एयर होस्टेस दंपति की प्रताड़ना की शिकार नाबालिग को इंसाफ देने के बजाय पुलिस ने उसी पर जुल्म ढाया। हालात यह हैं कि थानों के इर्द-गिर्द रेत और खनिजों से लदे वाहनों की कतारें पुलिस की 'कमाई' की कहानी खुद बयां कर रही हैं। यहां आम आदमी के लिए एफआईआर दर्ज कराना अब किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
जुल्म की दास्तां
पिरदा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले कारोबारी वीर शर्मा और उनकी पत्नी भारती शर्मा (एयर होस्टेस) के घर पंद्रह साल की रोमा (बदला हुआ नाम) घरेलू कामकाज करती थी। आर्थिक मजबूरी के चलते अक्टूबर 2025 में काम शुरू करने वाली इस बच्ची के लिए यह नौकरी नरक बन गई। वीर शर्मा और उसकी पत्नी न केवल उसे जातिसूचक गालियां देते थे, बल्कि छोटी गलतियों पर बेरहमी से पीटते भी थे। प्रताड़ना की हद तब पार हो गई जब जनवरी 2026 में वीर शर्मा ने मासूम पर दबाव डाला कि वह घर के एक डिब्बे में संदिग्ध सामान रखे और उसकी फोटो उसे भेजे। बच्ची को अहसास हो गया कि उसे फंसाया जा रहा है, इसलिए उसने 25 जनवरी से वहां जाना बंद कर दिया।
रसूखदारों के आगे नतमस्तक पुलिस
13 फरवरी को विधानसभा थाने के पुलिसकर्मी आरोपियों के साथ मिलकर बच्ची के रिश्तेदार के घर पहुंचे। वहां से उसे जबरन थाने ले जाया गया और रास्ते भर पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने न्याय करने के बजाय एयर होस्टेस दंपति से सीधा संपर्क साधा और पीड़ित परिवार को ही डराने-धमकाने लगे। थाने में एफआईआर दर्ज करने के बजाय पुलिस ने समझौता कराने के नाम पर तीन लाख रुपये की डिमांड की। डरे-सहमे रिश्तेदारों ने कर्ज लेकर 40 हजार रुपये की पहली किस्त आरोपियों को दी, जिसका सबूत पास की एक किराना दुकान के सीसीटीवी कैमरे में दर्ज है।
थाने में पट्टे से पिटाई और थर्ड डिग्री
पुलिस की बर्बरता यहीं नहीं रुकी। 20 फरवरी को महिला पुलिसकर्मियों ने बच्ची को पट्टे से इस कदर पीटा कि उसके कान से खून बहने लगा। तीन दिन तक उसे बालिका गृह में रखा गया और 23 फरवरी को कोर्ट ले जाकर जबरन समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए। पुलिस ने बच्ची के मौसा से खाली चेक भी ले लिया और पैसे न देने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की चेतावनी दे दी। रायपुर ग्रामीण में सक्रिय ऐसे पुलिस अधिकारी अब वरिष्ठों के निर्देशों को ठेंगा दिखाकर व्यवस्था को लाभ के धंधे में बदल चुके हैं।
ये कैसा सिस्टम .....
विधानसभा थाना ग्राम दोंदे खुर्द के पास रहने वाली इस नाबालिग के साथ हुए अन्याय ने पुलिस के 'मित्र' होने के दावे की पोल खोल दी है। जानकार बताते हैं कि रायपुर ग्रामीण के थानों में अब शिकायतकर्ता की माली हालत देखकर कार्रवाई तय की जाती है। इस पूरे प्रकरण में एयर होस्टेस दंपति को पूछताछ के लिए बुलाया तक नहीं गया, जबकि मासूम को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया गया। पीड़ित परिवार ने अब मुख्यमंत्री और पुलिस के आला अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इस मामले में जब विधानसभा थाना के संबंधित जांच अधिकारी और अन्य अफसरों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
