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सुप्रीम कोर्ट से सौम्या, सूर्यकांत और समीर बिश्नोई सहित अन्य को मिली राहत, लेकिन दो को अब भी जमानत का इंतजार
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला, शराब और डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाले में जेल में बंद आरोपियों के लिए बुधवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी और समीर बिश्नोई समेत लगभग सभी मुख्य आरोपियों को जमानत दे दी है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और पूर्व मंत्री कवासी लखमा की मुश्किलें फिलहाल कम नहीं हुई हैं। इन दोनों को अदालत से जमानत नहीं मिली है।

लंबे समय बाद मिली राहत: कोर्ट ने माना जांच में लगेगा वक्त
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि इन घोटालों की जांच एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें अभी काफी समय लग सकता है।
कोर्ट ने फिलहाल सौम्या चौरसिया, समीर बिश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आरोप खत्म हो गए हैं, बल्कि यह केवल ट्रायल पूरा होने तक की राहत है। आरोपियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश न करें।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन की अवैध लेवी वसूली गई थी, जो करीब 500 करोड़ रुपये का घोटाला है। वहीं, शराब घोटाले में सरकारी खजाने को लगभग 2000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है। डीएमएफ यानी खनिज मद के पैसों में भी बंदरबांट के गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और राज्य की एसीबी-ईओडब्ल्यू लगातार कार्रवाई कर रही है।
कोर्ट ने सभी को राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया गया है मामला चलते तक पेशी दिनांक पहुंचना अनिवार्य होगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
