हाईवे पर चलता था करोड़ों का खेल! ट्रकों से स्पंज आयरन चोरी कर कंपनियों में खपाया जाता था माल

हाईवे पर चलता था करोड़ों का खेल! ट्रकों से स्पंज आयरन चोरी कर कंपनियों में खपाया जाता था माल

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के Mahasamund जिले में टोल जांच के दौरान अवैध मिनरल ट्रेड का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि हाईवे पर चल रहे ट्रकों से स्पंज आयरन चोरी कर फर्जी बिलों के जरिए अलग-अलग कंपनियों में सप्लाई किया जा रहा था। शुरुआती जांच में इस पूरे नेटवर्क का कारोबार 106 करोड़ रुपये से अधिक का होने का अंदेशा जताया गया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई अन्य कंपनियां और लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

टोल जांच में पकड़े गए दो ट्रक
पुलिस को 25 फरवरी 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि CG 04 JC 4585 और CG 07 AV 5290 नंबर के ट्रकों से अवैध रूप से स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ट्रकों को रोककर जांच की और ड्राइवर सोनूलाल मोंगरे और रामेश्वर मानिकपुरी से दस्तावेज मांगे। वैध कागजात प्रस्तुत नहीं करने पर पुलिस ने माल को Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita की धारा 106 के तहत जब्त कर लिया।

फर्जी बिल से चलता था करोड़ों का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि रंजीत सिंह (निवासी बरगढ़, ओडिशा) चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से भंडारित कर कूट रचित बिलों के जरिए परिवहन कराता था। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ Bharatiya Nyaya Sanhita की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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रायगढ़ की इस्पात कंपनी का नाम आया सामने
पूछताछ में सामने आया कि Raigarh की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष और उनके सहयोगियों द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस ने Pusaur स्थित इस्पात फर्म में जांच के बाद तारक घोष (56) को भी गिरफ्तार कर लिया।

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कर्मचारियों के नाम पर बनाई गई फर्जी कंपनियां
जांच में यह भी सामने आया कि मासिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर शेल कंपनियां बनाकर फर्जी इनवॉइसिंग की जाती थी। इन कंपनियों के नाम से बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बिल जारी किए जाते थे, जबकि असली माल चोरी और अवैध भंडारण से जुटाया जाता था।

हवाला लेन-देन के संकेत
पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में करोड़ों रुपये के हवाला ट्रांजैक्शन के भी संकेत मिले हैं। दस्तावेजों की जांच में अब तक कारोबार का आकार 106 करोड़ रुपये से अधिक सामने आया है। मामले की जांच के लिए पुलिस ने स्पेशल टीम गठित की है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य कंपनियों और आरोपियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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