कोरबा पाम मॉल घोटाला: हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा, खात्मा खारिज कर 60 दिन में मांगी अंतिम रिपोर्ट 

कोरबा के बहुचर्चित पाम मॉल जमीन घोटाले मामले में पीड़िता अरुणिमा सिंह को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री सत्येंद्र प्रसाद ने 10 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कोरबा कोतवाली पुलिस द्वारा लगाए गए खात्मे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस की जांच को केवल 'सतही दिखावा' करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई और 7 बिंदुओं पर विस्तृत जांच के लिए 60 दिन के भीतर अंतिम प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से जमा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने पीड़िता अरुणिमा सिंह को बार बार थाने बुलाकर घंटों बैठाकर परेशान किया, जिस पर गंभीर नाराजगी जताते हुए कोतवाली थाना प्रभारी को आदेश दिया गया कि भविष्य में पीड़िता को थाने न बुलाया जाए, बल्कि आवश्यकता होने पर पुलिस उनके निवास स्थान पर जाकर सहयोग ले।


पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल


इस मामले में कोरबा पुलिस पहले ही कटघरे में है। कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि पुलिस लगातार पीड़िता को 2023 में खात्मा लगाने को लेकर गुमराह करती रही और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में भी झूठ बोलती रही। कोर्ट के आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की। अब 60 दिन के भीतर जमा होने वाले अंतिम प्रतिवेदन में यह देखना होगा कि इस पूरे खेल में किन-किन अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका सामने आती है।

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अंकित सिंह के कानूनी दाँव पेंच से पुलिस उलझी

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यह कानूनी लड़ाई वास्तव में पीड़िता के पुत्र अंकित सिंह के प्रयासों का परिणाम है। सूत्रों के अनुसार, अंकित सिंह ने पुलिस से ज्यादा स्वयं जांच की, तथ्य जुटाए, और खुद ही अपनी कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी जिद और कानूनी दाँव पेंच की बदौलत ही कोरबा पुलिस जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक इस मामले में बुरी तरह उलझ गई है। मामले में एक तरफ जिला भाजपा अध्यक्ष के भाई और कोरबा के प्रभावशाली व्यक्ति दिनेश मोदी हैं, और दूसरी तरफ अंकित सिंह हैं जिन्होंने अपनी लगन से जिला प्रशासन को झुका दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 60 दिन की इस नई जांच में कुछ बड़े अधिकारियों और प्रदेश के कुछ नामी हस्तियों की गिरफ्तारी हो सकती है। कोतवाली थाना प्रभारी के लिए अगले दो महीने काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं।

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