छत्तीसगढ़ विधानसभा अफीम की खेती और बस्तर में धान खरीदी के मुद्दे पर भारी हंगामा विपक्ष का वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा अफीम की खेती और बस्तर में धान खरीदी के मुद्दे पर भारी हंगामा विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का छठवां दिन राजनीतिक सरगर्मियों और भारी हंगामे के बीच संपन्न हुआ। सोमवार को सदन की कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई लेकिन जल्द ही यह तीखी बहसों और आरोपों के दौर में तब्दील हो गई। बस्तर संभाग में आदिवासियों की धान खरीदी में कथित अनियमितताओं और प्रदेश में अफीम की खेती के सनसनीखेज मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विभागीय मंत्री के जवाब से पूरी तरह असंतुष्ट होकर विपक्षी सदस्यों ने सदन के भीतर जोरदार नारेबाजी की और अंततः विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया। यह दिन सत्ता पक्ष के लिए बचाव और विपक्ष के लिए आक्रामक हमले का दिन साबित हुआ।

अफीम की खेती पर बवाल और स्थगन प्रस्ताव

सदन की कार्यवाही के दौरान सबसे अधिक गर्माहट अफीम की खेती के मुद्दे पर देखने को मिली। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विषय को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सांस्कृतिक पतन से जोड़ते हुए आक्रामक रुख अपनाया। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने विनायक ताम्रकार नामक व्यक्ति द्वारा अफीम की खेती किए जाने के अति गंभीर मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। डॉ महंत ने राज्य सरकार की मंशा पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन दोषियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने का भरपूर प्रयास कर रहा है। उन्होंने सदन में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जो कभी धान के कटोरे के रूप में जाना जाता था वहां अब धान के बजाय अफीम की खेती को प्रोत्साहित करना अत्यंत चिंताजनक है।

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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस विषय पर सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में भारी लीपापोती की गई है। बघेल ने सदन को बताया कि जब जिले के कलेक्टर ने स्वयं स्वीकार किया है कि जमीन विनायक ताम्रकार की है और वही मुख्य आरोपी है तो फिर प्रशासन उसके नौकर को मुख्य आरोपी बनाकर असली अपराधी को संरक्षण क्यों दे रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था लेकिन राज्य सरकार शायद अफीम की खेती करवाकर आय कई गुना बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन तीखे हमलों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार किया और कहा कि प्रदेश में अफीम की खेती की यह अवैध शुरुआत कांग्रेस के ही कार्यकाल में हुई थी।

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बस्तर में धान खरीदी पर विपक्ष का हंगामा 

बस्तर जैसे संवेदनशील आदिवासी बहुल क्षेत्र में धान खरीदी का मुद्दा भी प्रश्नकाल में जोरों से गूंजा। विधायक लखेश्वर बघेल और कवासी लखमा ने सरकार को आड़े हाथों लिया। लखेश्वर बघेल ने जानना चाहा कि बस्तर संभाग में धान खरीदी की प्रक्रिया कब शुरू और कब समाप्त हुई तथा कितने किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने सदन को बताया कि पंद्रह नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया इकतीस जनवरी को संपन्न हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि चवालीस हजार छह सौ बारह किसानों ने अपना धान नहीं बेचा है क्योंकि वे स्वयं खरीदी केंद्रों पर उपस्थित नहीं हुए। इस पर लखेश्वर बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार इक्कीस क्विंटल धान खरीदने के वादे से मुकर रही है और किसानों को भटका रही है। उन्होंने धान खरीदी में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप भी लगाया।

इसी क्रम में कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के लोगों की धान खरीदी नहीं होने के कारण वे अपना कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं और उन्हें मजबूर होकर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। खाद्य मंत्री ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि सरकार सभी उपस्थित किसानों का धान खरीद रही है। मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया। भूपेश बघेल ने यह भी पूछा कि बस्तर में कितने किसानों से धान का समर्पण कराया गया है और बताया कि नौ हजार नौ सौ छह किसानों ने अपना धान नहीं बेचा है।

वर्ष 2026 और 2027 की अनुदान मांगों पर चर्चा

इन राजनीतिक अवरोधों के बावजूद सदन में वर्ष 2026 और 2027 की अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों पर चर्चा करते हुए विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मौजूदा सरकार और उप मुख्यमंत्री राज्य के विकास के लिए एक सुदृढ़ नींव का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके समय में प्रदेश में भारी क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हुआ था जो आज सबको दिखाई देता है। उनका मानना था कि यदि बजट निर्माण से पूर्व सभी से विचार विमर्श किया जाता तो बजट और भी बेहतरीन बन सकता था। वहीं कांग्रेस विधायक द्वारकाधीश यादव ने वित्त और नगरीय प्रशासन विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।

दंतेवाड़ा में कुपोषण और विश्व कप की जीत का जिक्र

सदन में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी बात हुई। विधायक चैतराम अटामी ने दंतेवाड़ा में बच्चों में बढ़ते कुपोषण का अत्यंत संवेदनशील विषय उठाया और सहायता राशि में हो रहे विलंब पर सवाल किए। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने उत्तर देते हुए बताया कि क्षेत्र में पांच हजार दो सौ तीन कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया गया है और उनके लिए नियमित आहार परीक्षण तथा टीकाकरण की व्यवस्था की जा रही है।

दिनभर चली इस गहमागहमी के बीच एक सकारात्मक पल तब आया जब वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को सदन के पटल पर पूरे प्रदेश की ओर से बधाई दी।

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