सरकंडा ईडब्ल्यूएस विवाद : बिल्डर का पलटवार, पुलिस पर एकतरफा कार्यवाही और राजनैतिक संरक्षण का आरोप 

सरकंडा ईडब्ल्यूएस विवाद : बिल्डर का पलटवार, पुलिस पर एकतरफा कार्यवाही और राजनैतिक संरक्षण का आरोप 

 


बिलासपुर। शहर के सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित ईडब्ल्यूएस आवास विवाद ने अब एक नया  मोड़ ले लिया है। महिला की शिकायत पर हुई त्वरित गिरफ्तारी के बाद मुचलके पर रिहा हुए बिल्डर गौरव तिवारी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बिल्डर का आरोप है कि सरकंडा पुलिस ने बिना किसी  जांच या साक्ष्यों के सत्यापन के, राजनैतिक दबाव में आकर एकतरफा कार्यवाही की है।

फर्जी शिकायत पर तुरंत हुई पुलिसिया कार्रवाई से उठे सवाल...

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बिल्डर गौरव तिवारी ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई शिकायत पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकंडा पुलिस ने महिला की झूठी शिकायत को ही आधार मानकर आनन-फानन में कार्यवाही उनके खिलाफ कार्यवाही की है,
जबकि कानूनन किसी भी संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट लिखने से पहले तथ्यों की जांच अनिवार्य होती है।
बिल्डर का कहना है कि आखिर किसके संरक्षण में पुलिस ने यह एकतरफा कार्यवाही की? उन्होंने मांग की है कि जिस महिला ने झूठी शिकायत देकर कानून को गुमराह किया, उस पर अब तक अपराध दर्ज क्यों नहीं किया गया? मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सरकंडा थाना प्रभारी (TI) को तत्काल प्रभाव से हटाने और पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।

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बिल्डर ने कहा सीसीटीवी फुटेज में कैद है सच ....

अपनी बेगुनाही के सबूत के तौर पर बिल्डर ने ड्रीम इनक्लेव परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सार्वजनिक करने की मांग की  है। बिल्डर का कहना है कि है 
24 फरवरी की रात 8 से 9 बजे के बीच की फुटेज निकाली जाए। मैं उस वक्त अपने कार्यालय में मौजूद था। मैं न तो नगर निगम की कार्यवाही के दौरान वहां गया था और न ही घटनास्थल पर उपस्थित था। पुलिस अगर निष्पक्षता से फुटेज खंगाले, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।


बिल्डर ने बताया कि शिकायत करने वाली महिला को रसूखदार नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस ने बिना किसी तकनीकी साक्ष्य (जैसे लोकेशन ट्रेसिंग या फुटेज) के उन्हें अपराधी की तरह पेश किया।

क्या है पूरा मामला......

उल्लेखनीय है कि यह विवाद 24 फरवरी को नगर निगम की टीम द्वारा ईडब्ल्यूएस आवास के रास्ते को लेकर की गई कार्यवाही के बाद शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि बिल्डर ने मंदिर परिसर में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, धक्का-मुक्की की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो डालने का भी आरोप लगाया था, जिस पर पुलिस ने आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।

 

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