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गरीबों का राशन डकार गए रसूखदार: 30 लाख के फर्जीवाड़े में ना FIR, ना रिकवरी; अफसर बोले- पब्लिक पहले ई-KYC कराए
रायपुर। राजधानी में गरीबों का निवाला छीनने का बड़ा खेल चल रहा है। शहर की राशन दुकानों में 30 लाख रुपए से ज्यादा के चावल और शक्कर का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, लेकिन खाद्य विभाग के अफसरों की कुंभकर्णी नींद अब तक नहीं टूटी है। घोटालेबाजों पर विभाग की मेहरबानी का आलम यह है कि इतने बड़े गबन की न तो कोई जांच रिपोर्ट अब तक बन पाई है और न ही दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की जहमत उठाई गई है। हां, आम जनता को जरूर यह फरमान सुना दिया गया है कि जल्दी ई-केवाईसी (e-KYC) करा लो, वरना राशन का दाना नहीं मिलेगा।
एक ही दुकान में 19 लाख का झोल, अफसर बैठे मौन
सिस्टम की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण खमतराई के वीर शिवाजी वार्ड में दिखा। यहां की सिर्फ एक सरकारी राशन दुकान (आईडी 441001194) में करीब 19 लाख रुपए के चावल और शक्कर की हेराफेरी पकड़ी गई थी। जांच टीम ने जब स्टॉक का मिलान किया तो माल गायब था। इसके अलावा शहर की आधा दर्जन और ऐसी दुकानें हैं, जहां राशन बांटने में जमकर गड़बड़ी मिली।
नियम कहता है कि गबन पकड़े जाने पर दुकान संचालकों से खाद्यान्न के बदले पैसों की तुरंत रिकवरी होनी चाहिए। ऊपर से सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अफसर फाइलों को दबाकर बैठ गए हैं। न कोई रिकवरी हुई, न दुकान का लाइसेंस रद्द हुआ और न ही पुलिस तक मामला पहुंचा।
बिना अनुबंध ही धड़ल्ले से चल रहीं कोटा की दो दुकानें
खाद्य विभाग का मजाक कोटा इलाके में भी सरेआम उड़ रहा है। यहां राशन की दो दुकानें रामभरोसे चल रही हैं। इन दुकानों का विभाग के साथ कोई अनुबंध (एग्रीमेंट) ही नहीं है। अगर आप सरकारी वेबसाइट पर चेक करेंगे, तो ये दोनों दुकानें 'गुढ़ियारी महिला शक्ति स्व-सहायता समूह' के नाम पर दर्ज दिखती हैं। लेकिन मौके पर कहानी कुछ और ही है। वर्तमान में इन दुकानों पर कब्जा जमाने और संचालन के लिए अलग-अलग लोग अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। और हमेशा की तरह, अफसर यहां भी मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे हैं।
1 अप्रैल का अल्टीमेटम: दुकानों का भौतिक सत्यापन शुरू
घोटालेबाजों पर कोई एक्शन न लेने वाला विभाग अब कागजी खानापूर्ति में जुट गया है। शहर की राशन दुकानों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) शुरू कर दिया गया है। सभी दुकानदारों को 1 अप्रैल तक हर हाल में अपना पुराना स्टॉक क्लियर करने का अल्टीमेटम दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पुराने 30 लाख के फर्जीवाड़े का ही कोई हिसाब-किताब नहीं हुआ, तो इस नए सत्यापन से कौन सा तीर मारा जाएगा?
पब्लिक के लिए सख्त नियम: ई-केवाईसी नहीं तो राशन नहीं
राशन माफियाओं को खुली छूट देने वाले खाद्य विभाग ने आम जनता पर सख्ती जरूर बढ़ा दी है। अफसरों ने साफ कर दिया है कि हर राशन कार्ड धारक को ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। अगर किसी हितग्राही को एक साथ तीन महीने का चावल चाहिए, तो उसे तुरंत राशन दुकान जाकर अपना सत्यापन कराना होगा। रायपुर में अभी भी हजारों लोग ऐसे हैं जिन्होंने ई-केवाईसी नहीं कराया है। विभाग अब जनता से बार-बार अपील कर रहा है कि जल्दी सत्यापन कराएं ताकि उन्हें राशन लेने में कोई दिक्कत न हो।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
