जांजगीर-चांपा: जल संसाधन विभाग के दबंग EE शशांक सिंह की निकली हेकड़ी, कलेक्टर की फटकार के बाद अब ड्राइवर के पैरों में गिरे!

जांजगीर-चांपा: जल संसाधन विभाग के दबंग EE शशांक सिंह की निकली हेकड़ी, कलेक्टर की फटकार के बाद अब ड्राइवर के पैरों में गिरे!

नेशनल जगत विजन' की खबर का बड़ा असर, अब ड्राइवर से माफी मांगने के लिए लगा रहे मिन्नतें।

जांजगीर-चांपा। जिले का जल संसाधन विभाग इन दिनों एक रसूखदार अफसर की दबंगई और फिर उसके 'भीगी बिल्ली' बन जाने को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में है। विभाग के मुख्य कार्यपालन अभियंता (EE) शशांक सिंह, जो कभी अपने मातहतों पर रौब झाड़ते थे, अब कलेक्टर की एक सख्त फटकार के बाद अपने ही विभाग के वाहन चालक के सामने गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं। मामला ड्राइवर के साथ भद्दी गाली-गलौज और दुर्व्यवहार का है। 'नेशनल जगत विजन' द्वारा इस खबर को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि अफसर के तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए हैं। घटना का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने न केवल ईई को नोटिस जारी किया है, बल्कि पूरे मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

जांच के घेरे में ईई की पूरी कार्यप्रणाली

कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अपर कलेक्टर को तत्काल जांच रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जांच सिर्फ गाली-गलौज या दुर्व्यवहार की एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि ईई शशांक सिंह की पूरी कार्यप्रणाली, उनकी प्रशासनिक शैली और कार्यालय में उनके रवैये को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इससे इस अफसर की मुश्किलें और बढ़ना तय माना जा रहा है।

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ऊंची पहुंच' का रौब से कर्मचारियों में भारी आक्रोश

जल संसाधन विभाग के दफ्तर में इन दिनों तनाव और आक्रोश का माहौल है। नाम न छापने की शर्त पर विभाग के कई कर्मचारियों ने बताया कि ईई शशांक सिंह की कार्यशैली से वे लंबे समय से त्रस्त हैं। आरोप है कि यह अधिकारी हमेशा अपनी 'ऊंची पहुंच' की धौंस देकर छोटे कर्मचारियों को धमकाने का काम करते हैं। कार्यालय में उनकी मनमानी इस कदर हावी है कि जिले में उन्हें अब एक 'विवादित' अधिकारी के तौर पर ही पहचाना जाने लगा है।

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विवादों से रहा है पुराना नाता, ट्रांसफर रुकवाने के भी आरोप

 

ईई शशांक सिंह के लिए विवादों में रहना कोई नई बात नहीं है। विभागीय जानकारों की मानें तो इससे पहले भी उनका विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ तीखा विवाद हो चुका है। विभागीय कार्यों में कथित अनियमितताओं के साथ-साथ मातहतों से बदसलूकी की शिकायतें पहले भी दबी जुबान में होती रही हैं। हद तो तब हो गई जब जिले से उनका ट्रांसफर होने के बाद, कथित तौर पर भारी लेन-देन कर उस ट्रांसफर को रुकवाने के गंभीर आरोप भी उन पर लगे। इन पुराने विवादों की लंबी फेहरिस्त अब उनके लिए गले की फांस बन गई है।

 

अब आगे क्या? एडीएम की रिपोर्ट पर टिकी नजरे

लगातार सामने आ रहे विवादों ने जल संसाधन विभाग की साख और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिले के प्रशासनिक गलियारों में अब यही चर्चा है कि क्या महज एक माफीनामे या सामान्य नोटिस से इस आदतन विवादित अधिकारी को क्लीन चिट मिल जाएगी? या फिर जिला प्रशासन इस मामले में कोई ऐसी सख्त कार्रवाई करेगा जो अनुशासन की नजीर बनेगी? फिलहाल सभी की निगाहें अपर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार उनके स्वाभिमान की जीत होगी और कार्यालयीन दबंगई पर हमेशा के लिए लगाम लगेगी।

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